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प्राइवेट कम्पनियों में भी लडकियों को दी जाती है तवज्जो

By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Oct, 2012

प्राइवेट कम्पनियों में भी लडकियों को दी जाती है तवज्जो
आज जब लडकियां भी लडकों के बराबर ही शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढाते हुए वे भी शिक्षा पूरी कर नौकरी तलाशती हैं। इसमें उन्हें माता-पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है। माता-पिता के पास इसके लिए अपने कारण हैं। यह नहीं कि उनकी मानसिकता बदली है किन्तु आर्थिक, लाभ-हानि के कारण ही वे लडकियों को दूसरे शहर में अकेले रह कर भी नौकरी करने की छूट देने लगे हैं।
सरकार ने सरकारी पदों के लिए तीस प्रतिशत स्थान लडकियां के लिये आरक्षित कर दिया है, ताकि लडकियां भी आगे बढ सकें और इसके साथ प्राइवेट कम्पनीज भी आजकल उनकी कार्यकुशलता देख उन्हें ही प्राथमिकता देने लगी हैं। उनका दूसरा प्लस पाइंट है उनका किसी भी प्रकार की गुटबाजी और यूनियन आदि की पॉलिटिक्स से दूर रहना। इसके अलावा वे सिंनियर ज्यादा होती हैं और रिश्वत आदि से दूर रहती हैं।
आज ज्यादा से ज्यादा लडकियां पढ-लिख कर नौकरी करना चाहती हैं। बडे शहरों में तो खासकर किसी सरकारी या गैरसरकारी संस्थान में चले जाइये आपको वहां काफी तादाद में लडकियां कार्य करती मिलेंगी। इससे समाज में अनेक समस्याएं जरूर पैदा हो गई हैं लेकिन अब शायद इतना आगे बढकर पीछे मुडने का नजदीक भविष्य में तो कोई चांस नजर नहीं आता। विभिन्न वर्ग की लडकियों के विचार कुछ इस तरह हैं। लडकी की नौकरी आज उसके दहेज का विकल्प है। समझ लीजिए विवाह के मार्केट में अपने को वैल्युवल बनाने के लिये नौकरी कर रही हूं।
बहुत पहले एक फिल्म आई थी (तपस्या )जिसमें राखी ने घर की बडी लडकी का रोल किया था। उसी पर घर की सारी जिम्मेदारी आन पडी थी जिसे उसने भाई-बहनों के लिए पिता का कत्तव्य निभाते हुए पूरी की। स्वयं शादी न कर छोटे भाई-बहनों को सैटल करने में ही उसने अपनी जवानी होम कर दी। इसी प्रकार हमारे यहां हजारों लडकियां ऎसी तपस्या करते हुए अपना सम्पूर्ण जीवन होम कर देती हैं। उनके लिए नौकरी उनका शौक नहीं, बल्कि मजबूरी होती है।

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