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Parenting : टीनएजर्स को सुरक्षित और समझदार बनाने के लिए माता-पिता की 5 जरूरी सीख

By: Team Aapkisaheli | Posted: 24 May, 2026

Parenting : टीनएजर्स को सुरक्षित और समझदार बनाने के लिए माता-पिता की 5 जरूरी सीख
किशोरावस्था यानी टीनएज जीवन का एक ऐसा पड़ाव है जिसमें बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। इस उम्र में वे बाहरी दुनिया नए दोस्तों और सोशल मीडिया के प्रभाव में बहुत जल्दी आ जाते हैं। सही मार्गदर्शन न मिलने पर बच्चों के भटकाव या गलत संगत में पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। आधुनिक समय की चुनौतियों को देखते हुए माता-पिता के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे अपने बढ़ते बच्चों को कुछ महत्वपूर्ण बातें समय रहते सिखाएं ताकि वे भावनात्मक रूप से मजबूत और सतर्क बन सकें। ​
असहज करने वाली बातों पर न कहना सिखाएंः ​

बच्चों को यह समझना बहुत जरूरी है कि हर किसी की बात से सहमत होना या हर बात को मानना आवश्यक नहीं है। यदि उन्हें कोई स्थिति किसी का व्यवहार या कोई बात गलत लगती है तो उन्हें बिना डरे साफ शब्दों में मना करना आना चाहिए। 

बच्चों को सिखाएं कि न कहना कोई अशिष्टता या बदतमीजी नहीं है बल्कि यह खुद को सुरक्षित रखने और अपनी सीमाएं तय करने का एक सही तरीका है। कई बार लोग दबाव बनाकर अपनी बात मनवाने का प्रयास करते हैं, इसलिए बच्चों में सही और गलत की पहचान कर मना करने का आत्मविश्वास होना चाहिए। ​

माता-पिता को अपना शुभचिंतक समझेंः ​
इस उम्र में अक्सर बच्चों और माता-पिता के बीच विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है। ऐसे में कई बार बाहरी लोग या दोस्त खुद को अधिक आधुनिक और हितैषी दिखाकर बच्चों को उनके परिवार के खिलाफ भड़काने का प्रयास करते हैं। बच्चों को यह बात गहराई से समझनी होगी कि माता-पिता द्वारा की जाने वाली रोक-टोक के पीछे केवल उनकी सुरक्षा और प्रेम की भावना होती है। माता-पिता बच्चों के मार्गदर्शक होते हैं शत्रु नहीं। ​

अपनी कमजोरियों को हर किसी से साझा न करेंः

​माता-पिता को अपने बच्चों को यह सीख देनी चाहिए कि वे अपने मन का डर व्यक्तिगत बातें या अपनी कमजोरियां हर किसी के सामने उजागर न करें। दुनिया में हर व्यक्ति निस्वार्थ भाव से मदद नहीं करता है। कुछ लोग पहले सहानुभूति दिखाकर बच्चों का भरोसा जीतते हैं और बाद में उनकी निजी जानकारियों का गलत फायदा उठाकर उन्हें भावनात्मक रूप से कमजोर करने या डराने की कोशिश करते हैं। बच्चों को अपनी व्यक्तिगत बातें केवल उन्हीं के साथ साझा करनी चाहिए जिन पर वे पूरी तरह विश्वास करते हैं। ​

शॉर्टकट और लालच के जाल से सावधान रहेंः 
​इस उम्र में बच्चे अपने भविष्य और करियर को लेकर उत्सुक और चिंतित रहते हैं। जल्दी सफल होने या कम समय में धन कमाने की इच्छा में वे अक्सर गलत लोगों के झांसे में आ जाते हैं। आज के समय में इंटरनेट और असल जिंदगी में कई ऐसे लोग सक्रिय हैं जो कम मेहनत में बड़े सपने दिखाकर बच्चों को गुमराह करते हैं। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है और बिना सच्ची मेहनत के हासिल की गई चीजें स्थाई नहीं होती हैं। ​

सोशल मीडिया पर गोपनीयता बनाए रखना है जरूरीः

​आजकल सोशल मीडिया युवाओं के जीवन का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है। अधिक लाइक्स और लोकप्रियता पाने की होड़ में बच्चे अक्सर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और व्यक्तिगत जानकारियां इंटरनेट पर पोस्ट कर देते हैं। बच्चों को यह सिखाना बहुत आवश्यक है कि सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा सक्रियता और निजी जानकारियों को साझा करना सुरक्षित नहीं है। इससे उनकी गोपनीयता भंग होती है और असामाजिक तत्व इस डेटा का गलत उपयोग कर सकते हैं। उन्हें इंटरनेट के सुरक्षित और सीमित उपयोग की समझ होना अनिवार्य है। 

-हेमलता शर्मा, जयपुर

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