बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं, सही देखभाल से जीवन बनाएं खुशहाल
By: Team Aapkisaheli | Posted: 05 Feb, 2026
नई दिल्ली। बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं है, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक और सम्मानजनक पड़ाव है। जिस तरह बचपन और युवावस्था की अपनी जरूरतें होती हैं, उसी तरह बुढ़ापे की भी अपनी खास जरूरतें और चुनौतियां होती हैं।
अक्सर हम उम्र बढ़ने के साथ आने वाली थकान, कमजोरी, याददाश्त की कमी या चलने-फिरने की परेशानी को बीमारी मान लेते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि ये शरीर में धीरे-धीरे होने वाले सामान्य बदलाव हैं। अगर समय रहते सही देखभाल, समझदारी और प्यार मिले, तो बुज़ुर्ग भी स्वस्थ, सक्रिय और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
बुढ़ापे में सबसे ज्यादा जरूरत होती है मानसिक सुकून और भावनात्मक सहारे की। इस उम्र में व्यक्ति को अकेलापन, उपेक्षा और असुरक्षा का एहसास जल्दी होने लगता है। परिवार के साथ बैठकर बातचीत करना, उनके अनुभवों को सुनना और उन्हें सम्मान देना बुज़ुर्गों के मन को मजबूत बनाता है। जब मन खुश रहता है तो शरीर भी बेहतर तरीके से काम करता है। तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं कम होती हैं और नींद व भूख भी सुधरती है।
शारीरिक स्वास्थ्य की बात करें तो बुढ़ापे में भारी काम या ज्यादा कठिन व्यायाम की जरूरत नहीं होती। रोजाना हल्की सैर, योग, प्राणायाम और थोड़ा-बहुत स्ट्रेचिंग शरीर को चुस्त रखने के लिए काफी है। सही और संतुलित भोजन बहुत जरूरी होता है।
ताजा बना खाना, हरी सब्जियां, फल, दूध और पर्याप्त पानी शरीर को जरूरी पोषण देते हैं। बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
घर पर की जाने वाली छोटी-छोटी देखभाल भी बुजुर्गों के जीवन को आसान बना सकती है। जैसे रात को पैरों में तेल की मालिश करने से नींद अच्छी आती है, गुनगुने पानी से नहाने से जोड़ों का दर्द कम होता है और आंखों को आराम देने से देखने की परेशानी घटती है। दांतों और मुंह की सफाई, नियमित रूप से नहाना और साफ कपड़े पहनना न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि आत्मविश्वास के लिए भी जरूरी है।
बुढ़ापे में नियमित स्वास्थ्य जांच बहुत अहम होती है। ब्लड प्रेशर, शुगर, आंखों, कानों और हड्डियों की समय-समय पर जांच कराते रहने से बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। दवा सही समय पर लेना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही, बुजुर्गों को उनकी क्षमता के अनुसार छोटे-छोटे कामों में शामिल रखना चाहिए ताकि वे खुद को बेकार या बोझ महसूस न करें।
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