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हौसलों को उडान देती है मां

By: Team Aapkisaheli | Posted: 23 Nov, 2012

हौसलों को उडान देती है मां
ब्रहमांड और प्रकृति की रचना के बाद ईश्वर ने मनुष्य की जब सृष्टि की तो उसने स्त्राr को पुरूष से भी सर्वश्रेष् बनाया। उसे सौंदर्य दिया, सृजन का अधिकार दिया। यहीं नहीं मां की भूमिका निभाने के साथ उसे भगवान के बराबर दर्जा देते हुए उसे गुरू से भी बडा बनाया। यही वजह है कि दुनिया के किसी भी कोने में वह हो, मां सदैव एक जैसी रही। सूरत भले अलग हो मगर सीरत एक जैसी रहती है। सदियां बीत गई, मगर मां और बच्चे का संबंध कभी नहीं बदला। किसी भी रिश्ते में बेशक बदलाव आ जाए मगर मां-बच्चे के संबंध में हमेशा गर्मजोशी रहती है। अपने बच्चों को हमेशा पलकों की छांव में रखने वाली मां आज भी यही चाहती है कि उसके बच्चों पर किसी बुरे व्यक्ति का साया न पडे। उसे अपने आंचल में छुपा कर रखती है। बच्चों को अच्छे-बुरे का पहला ज्ञान तो वही देती है। मां को गुरू दर्जा यों ही नहीं मिला। बच्चों को अनुशासन का पहला पाठ वही तो पढाती है। नवजात के जन्म से लेकर नर्सरी में जाने तक मां वस्तुत: एक आदर्श पुरूष या नारी को ही तैयार कर रही होती है।
अक्षर ज्ञान से लेकर रंगों का ज्ञान, प्रकृति से रूबरू कराने से लेकर अपने आसपास के बारे में इस तरह बताती-सिखाती चलती है कि बच्चा जब घुटनों के बल खडा होता है या दौडता है तो वह अपनी मां की नसीहतों को अवचेतन में रखता है। नसीहत देने की आदत मांओं की पुरानी आदत रही है। अब इसमें भी बदलाव आया है। हालांकि बेटियां आज भी अपनी मां से सलाह लिए बिना कभी कोई कदम नहीं उठाती। मगर बेटे अब बदल रहे हैं। बच्चों को अपने आंचल से बांधे रखने का दौर अब खत्म हो चुका है। ज्यादातर आधुनिक मांएं इस बात को समझ चुकी हैं कि नसीहत देने से अच्छा है कि बच्चों की वे मार्गदर्शक बनें। वे अपने बेटे-बेटियों को ज्ञान के पंख देकर उन्हें उडान भरने देना चाहती हैं। कामकाजी ही नहीं, घरेलू महिलाएं भी बच्चों के कя┐╜रियर की चिंता करती हैं।
बच्चे पांचवी क्लास पार करते हैं तो उन्हें मांएं कुछ बनने की प्रेरणा देना शुरू कर देती हैं। कम पढी-लिखी मांओ में भी इन दिनों गजब का आत्मविश्वास देखा जा सकता है। वे हर हाल में बच्चों को पढाना चाहती हैं। खुद नहीं पढा सकतीं तो ट्यूटर रख लेती हैं। कभी-कभार स्कूल जाकर बच्चे की पगति रिपोर्ट भी ले लेती हैं। परवरिश में कोई कसर नहीं छोडती। पिता बेशक सुबह बिस्तर पर सोया रहे। मगर यह मां ही है, जो बच्चे को उठाकर स्कूल के लिए तैयार करती हैं। उनका बस्ता ठीक से लगाने से लेकर लंच बाक्स तक तैयार करती हैं।

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