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कै से करें बेहतर इंजीनियरिंग कॉलेज की परखक्

By: Team Aapkisaheli | Posted: 16 July, 2012

कै से करें बेहतर इंजीनियरिंग कॉलेज की परखक्
बारहवीं कक्षा साइंस मैथमैटिक्स में करने के बाद विद्यार्थियों के सामने सबसे बडी समस्या यह आती है कि वे कौन से इंजीनियरिंग कॉलेज में अपना दाखिला करवाएं। वर्तमान समय में हर शहर में कई इंजीनियरिंग कॉलेज खुले हैं। सरकारी कॉलेजों के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थाओं द्वारा स्थापित किए गए कॉलेजों में भी विद्यार्थियों को बेहतरीन शिक्षा प्रदान की जाती है। यदि आप इंजीनियर बनने जा रहे हैं तो कि सी भी कॉलेज में एडमिशन का फै सला करने से पहले इन चार कसौटियों को जरूर परख लें।
प्लेसमेंट क्वालिटी
इस मामले में दो बातों क ा ध्यान रखा जाना जरूरी है-कुल कितने छात्रों को प्लेसमेंट मिला और छात्रों को रिक्रू ट करने वाली कं पनियां किस स्तर की थीं। ये दोनों ही मानक संस्थान की गुणवत्ता के बारे में बहुत कु छ बता देते हैं। पहले ये पता लगाएं कि इंजीनियरिंग की सारी ब्रांचों से औसत प्लेसमेंट कितना हुआ हैं। यदि कं पनियों की सूची और प्लेसमेंट की संख्या आपको दे दी जाती है तो यह संस्थान की ईमानदारी का संके त है। यह जानना भी जरूरी है कि हर ब्रांच से कितना प्लेंसमेंट हुआ है।
इंन्फ्र स्ट्रक्चर सुविधाएं
सिर्फ कॉलेज की बिल्डिंग और मैदान देखकर ही फै सला न करें। यह देखें कि लैबोरेट्रीज कितनी हैं। आप इंजिनीयरिंग की जो ब्रांच लेना चाहते हैं उसकी लैब किस स्तर की है। क्या वे आधुनिक उपकरणों से लैस हैं। लाइब्रेरी में कौन-से ई-जनलर्स उपलब्ध हैं। क ॉलेज की वेबसाइट से इन सवालों के जवाब पाना आसान नहीं है। इसलिए या तो वहां अभी पढ रहे छात्र से बात करें या संस्थान के पूर्व छात्र से, जिस पर आप भरोसा कर सकें । संभव हो तो खुद जाकर देखें।
शिक्षकों की गुणवत्ता
कि सी भी छात्र के लिए इसका आकलन करना बहुत कठिन होता है। यदि अधिकतर फै कल्टी सदस्यों के पास 25-30 साल का अनुभव है तो इसका अर्थ है कि वे रिटायर हो चुके होंगे या होने वाले होंगे। यदि औसत फै कल्टी सदस्य 3-5 साल का अनुभव रखते हैं तो उन्हें पढाने का अनुभव अधिक नहीं होगा। दोनों ही स्थितियां दर्शाती हैं कि फै कल्टी मजबूत नहीं है। जितने अधिक फै कल्टी के पास 10-20 साल का अनुभव है, फै कल्टी उतनी ही अच्छी होगी।
इंडस्ट्री के साथ संपर्क
माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च सेंटर या आईबीएम रिसर्च सेंटर या टीआईएफएसी जैसे औद्यौगिक कें द्रों के साथ संस्थान के टाई-अप की भी जानकारी लें। विजिटर्स या गेस्ट लेक्चर के नाम देखक र तुरंत प्रभावित न हो जाएं। इनकी संख्या सिर्फ इतना दर्शाती है कि संस्थान का जनसंपर्क बहुत अच्छा है।

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