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Health Advice : मोमोज-चाऊमीन से डायबिटीज का खतरा, दिल की सेहत पर भी पड़ता है असर

By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Jan, 2026

Health Advice : मोमोज-चाऊमीन से डायबिटीज का खतरा, दिल की सेहत पर भी पड़ता है असर
नई दिल्ली। आजकल फास्ट फूड लोगों की जिंदगी में अहम हिस्सा बन चुका है। भूख लगने पर लोग मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा और बर्गर जैसी चीजें खरीद लेते हैं। स्वाद के लिए ये चीजें जरूर लुभावनी होती हैं, लेकिन यही हमारी सेहत के लिए बड़े खतरे की घंटी भी साबित हो सकती हैं। 
हाल ही में एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन इलाकों में फास्ट फूड की दुकानें आसानी से उपलब्ध हैं, वहां रहने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह रिसर्च चेन्नई के कई इलाकों में की गई थी, और इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। 

रिसर्च में देखा गया कि जिन लोगों के घर के 400 मीटर के दायरे में मोमोज और चाऊमीन जैसी फास्ट फूड की दुकानें होती हैं, वहां रहने वाले लोग बार-बार बाहर का खाना खाने लगते हैं। घर के पौष्टिक भोजन का सेवन धीरे-धीरे कम होने लगता है। लगातार बाहर का खाना खाने से शरीर में फैट जमा होने लगता है, जिससे मोटापा बढ़ता है और ब्लड शुगर का लेवल असंतुलित हो जाता है। यही कारण है कि टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। 

मोमोज और चाऊमीन की बात करें तो ये खाने में स्वादिष्ट लगते हैं, लेकिन इनमें बड़े पैमाने पर मैदा, रिफाइंड ऑयल और ज्यादा नमक होता है। मैदा ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाता है, जिससे शरीर को इंसुलिन की जरूरत बढ़ जाती है। अगर शरीर बार-बार इतनी अधिक इंसुलिन का सामना करता है तो इंसुलिन रेजिस्टेंस होने लगता है और यही डायबिटीज की शुरुआत हो सकती है। 

इसके अलावा, ज्यादा तेल और नमक का सेवन दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को भी बढ़ाता है। यह समस्या सिर्फ वयस्कों तक ही सीमित नहीं है। रिसर्च में यह भी सामने आया है कि स्कूल-कॉलेज के आसपास फास्ट फूड स्टॉल होने से बच्चों और युवाओं में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। आज के बच्चे हर दूसरे दिन मोमोज और चाऊमीन खा रहे हैं। इससे उनका शरीर जल्दी कैलोरी लेने लगता है, वजन बढ़ता है और ब्लड शुगर लेवल असंतुलित होता है। कम उम्र में ही बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज का खतरा पैदा हो रहा है। 

फास्ट फूड का लगातार सेवन करने से न सिर्फ वजन और ब्लड शुगर प्रभावित होते हैं, बल्कि इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। तैलीय और नमकीन खाने से शरीर में ऊर्जा का असंतुलन होता है, जिससे बच्चे और युवा जल्दी थकते हैं, उनकी एकाग्रता कम होती है, और उन्हें नींद की कमी भी महसूस होती है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने फास्ट फूड को केवल पेट भरने वाली चीज नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे के रूप में बताया है। लेकिन इससे बचाव संभव है। सबसे जरूरी है कि हम अपने खाने की आदतों में संतुलन बनाएं। 

मोमोज, चाऊमीन और बर्गर जैसी चीजें महीने में सिर्फ एक या दो बार ही खाएं। घर का ताजा और पौष्टिक खाना खाने की आदत डालें, जिसमें दाल, सब्जी, चावल, रोटी और फल शामिल हों। रोजाना कम से कम तीस मिनट की हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। इससे शरीर की कैलोरी बर्न होगी और ब्लड शुगर नियंत्रित रहेगा। इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी भी शरीर में मोटापे और डायबिटीज का कारण बन सकती है। 

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