बच्चों को बिना फोन दिखाए इस तरह खिलाएं खाना, बिल्कुल नहीं होंगे बोर
By: Team Aapkisaheli | Posted: 26 Jun, 2026
आजकल कई माता-पिता बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल फोन या कार्टून का सहारा लेने लगे हैं। शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे फोन देखते हुए ही खाना खाने की आदत बना लेते हैं। इसका असर उनकी एकाग्रता, आंखों की सेहत और खाने की आदतों पर भी पड़ सकता है। कई बच्चे बिना स्क्रीन के खाना खाने से मना कर देते हैं, जिससे पेरेंट्स की परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को खाना खिलाने के लिए कुछ मजेदार और रचनात्मक तरीके अपनाए जाएं। सही माहौल और थोड़ी-सी कोशिश से बच्चे बिना फोन के भी खुशी-खुशी खाना खा सकते हैं।
खाने को बनाएं मजेदार और रंगीनबच्चों को आकर्षक चीजें बहुत पसंद आती हैं। अगर खाने की प्लेट रंग-बिरंगी और खूबसूरती से सजाई गई हो, तो उनका ध्यान अपने आप खाने की ओर जाता है। आप फलों, सब्जियों और रोटी को अलग-अलग शेप में काटकर परोस सकते हैं। स्माइली फेस, फूल या कार्टून जैसी डिजाइन बच्चों को काफी पसंद आती हैं। जब खाना देखने में मजेदार लगेगा, तो बच्चा उसे खाने के लिए ज्यादा उत्साहित रहेगा और फोन की जरूरत भी कम महसूस होगी।
खाने के दौरान करें बातचीतकई बार बच्चे बोरियत की वजह से खाना नहीं खाते। ऐसे में फोन देने की बजाय उनके साथ बातचीत करें। उनसे स्कूल, दोस्तों, पसंदीदा खेल या दिनभर की गतिविधियों के बारे में पूछें। जब बच्चा बातचीत में शामिल होता है, तो उसका ध्यान खाने पर भी बना रहता है। परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की आदत भी बच्चों को बेहतर खानपान और अच्छे व्यवहार सिखाती है।
छोटी-छोटी गेम्स का लें सहाराखाने के समय कुछ हल्की-फुल्की गेम्स भी बच्चों को व्यस्त रख सकती हैं। जैसे किसी फल या सब्जी का नाम बताने का खेल, रंग पहचानने का खेल या छोटी पहेलियां पूछना। इससे बच्चे एंटरटेन भी होते हैं और खाना खाने में उनकी रुचि बनी रहती है। ध्यान रखें कि गेम्स बहुत ज्यादा ध्यान भटकाने वाली न हों, बल्कि खाने के साथ आसानी से की जा सकें।
बच्चों को खाना चुनने में दें मौकाजब बच्चों को अपनी पसंद का हेल्दी खाना चुनने का मौका मिलता है, तो वे उसे ज्यादा खुशी से खाते हैं। आप उनसे पूछ सकते हैं कि आज सलाद में कौन-सा फल चाहिए या रोटी किस शेप में बनानी है। इससे बच्चे खुद को शामिल महसूस करते हैं और खाने के प्रति उनका उत्साह बढ़ता है। धीरे-धीरे वे बिना किसी स्क्रीन के भी खाने का आनंद लेना सीख जाते हैं। प्यार, धैर्य और थोड़ी रचनात्मकता के साथ आप बच्चों की फोन पर निर्भरता कम कर सकते हैं और उन्हें स्वस्थ खाने की आदतें सिखा सकते हैं।
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