भैरव अष्टमी 9 फरवरी को, जानकी जन्मोत्सव और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, जानें शुभ-अशुभ समय
By: Team Aapkisaheli | Posted: 08 Feb, 2026
नई दिल्ली। सोमवार 9 फरवरी को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, जो पूर्ण रात्रि तक रहेगी। इस दिन तीन धार्मिक पर्व हैं। भैरव अष्टमी या कालाष्टमी, जानकी जन्मोत्सव और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी। भक्तजन इन अवसरों पर विशेष पूजा, व्रत और जागरण करते हैं।
भैरव अष्टमी या कालाष्टमी हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। यह भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। भक्त उपवास रखकर पूजा करते हैं, जो सुरक्षा, नकारात्मकता से मुक्ति और बाधाओं के निवारण के लिए की जाती है।
8 फरवरी को जानकी जन्मोत्सव भी है, जो फाल्गुन कृष्ण की अष्टमी को मनाई जाती है, माता सीता के जन्म के उत्सव को सीता अष्टमी भी कहते हैं।
इस दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी है, स्कंदपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण आदि ग्रंथों में इसका महत्व बताया गया है। भक्त लड्डू गोपाल की पूजा, भजन-कीर्तन और जागरण करते हैं, जिससे सुख, शांति और कृपा प्राप्त होती है।
दृक पंचांग के अनुसार सोमवार को नक्षत्र विशाखा पूर्ण रात्रि तक रहेगा। योग वृद्धि 10 फरवरी की रात 12 बजकर 52 मिनट तक है। करण बालव शाम 6 बजकर 12 मिनट तक और फिर कौलव पूर्ण रात्रि तक रहेगा। चंद्रमा तुला राशि में संचार करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 4 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 7 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 4 मिनट से 6 बजकर 30 मिनट तक और अमृत काल रात 10 बजकर 4 मिनट से 11 बजकर 51 मिनट तक है।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 8 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 50 मिनट तक है। यमगंड सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है। गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक है। वहीं, आडल योग पूरे दिन है। इनमें शुभ कार्य वर्जित होता है।
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