पीरियड्स के दौरान पहली बार वाया फेराटा पर्वत शिखर की चोटी पर पहुंची कुब्रा सैत

By: Team Aapkisaheli | Posted: 07 Oct, 2026

पीरियड्स के दौरान पहली बार वाया फेराटा पर्वत शिखर की चोटी पर पहुंची कुब्रा सैत

बॉलीवुड डेस्क। मुंबई 

अभिनेत्री, लेखिका और एडवेंचर प्रेमी कुब्रा सैत हमेशा अपनी सीमाओं को चुनौती देने के लिए जानी जाती हैं, और उनकी हालिया उपलब्धि इसका एक और उदाहरण है। जी हाँ, सेक्रेड गेम्स और फर्जी फेम अभिनेत्री ने हाल ही में पीरियड्स के दौरान अपनी पहली वाया फेराटा पर्वत शिखर की चढ़ाई पूरी करने के अनुभव को लेकर उन्होंने एक भावुक पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने दृढ़ता, अनुकूलन क्षमता और मानव शरीर की अद्भुत ताकत के बारे में बात की है। 

इस चुनौतीपूर्ण चढ़ाई की तस्वीरें साझा करते हुए कुब्रा ने बताया कि यह सफर शारीरिक रूप से कठिन जरूर था, लेकिन इसने उन्हें यह भी एहसास दिलाया कि हमारा शरीर कितनी अद्भुत क्षमता रखता है, यहां तक कि उन परिस्थितियों में भी जब अधिकांश लोग आराम करना पसंद करते हैं। अपने अनुभव को याद करते हुए कुब्रा ने लिखा है, अपने कदमों पर भरोसा रखिए। लोग अक्सर बदलाव के बारे में बात करते हैं, उसकी तैयारी करते हैं और उसे समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन असली बदलाव तब आता है जब हम अपने सुरक्षित दायरे से बाहर निकलकर मुश्किल चुनौतियों का सामना करते हैं। 

इस पर्वत चढ़ाई के ज़रिये कुब्रा ने यह भी बताया कि उन्होंने स्वेच्छा से कठिन रास्ते चुनने की अहमियत को और बेहतर तरीके से समझा है। उनके अनुसार, जीवन में चुनौतियां और मुश्किलें बिना किसी चेतावनी के कभी भी आ सकती हैं। ऐसे में अपनी इच्छा से कठिन अनुभवों का सामना करना हमें मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है और जीवन की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए तैयार करता है। 

अपने अनुभव को और दिलचस्प बनाते हुए कुब्रा ने बताया कि उनके 69 वर्षीय माउंटेन गाइड पिछले चार दशकों से पर्वतारोहण कर रहे हैं, जबकि कई छोटे बच्चे भी इस रूट को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। इस बात ने उन्हें महसूस कराया कि अक्सर हमारा डर वास्तविक चुनौती से कहीं बड़ा होता है। 

कुब्रा की यह ईमानदार पोस्ट खास तौर पर महिलाओं के बीच काफी पसंद की जा रही है, क्योंकि यह उस धारणा को चुनौती देती है कि मासिक धर्म हमेशा किसी सीमा या बाधा का कारण बनता है। इसके बजाय, उनका अनुभव शरीर की उस क्षमता का उत्सव है, जो हर परिस्थिति में खुद को ढाल सकता है, कठिनाइयों को सह सकता है और आगे बढ़ सकता है। 

अपनी बात को सकारात्मक संदेश के साथ समाप्त करते हुए कुब्रा ने लोगों को चुनौतियों से भागने के बजाय उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उनका संदेश साफ है कि पहाड़ों पहाड़ पर चढ़िए, अपने कदमों पर भरोसा रखिए और मुश्किल काम कीजिए; हो सकता है कि इसी रास्ते पर आपको अपने व्यक्तित्व का वह रूप मिले, जिससे आप अब तक अनजान थे।

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