भारत एआई को लेकर प्रबल आशावाद और विश्वास दिखाता है : ऋषि सुनक
By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Feb, 2026
नई दिल्ली। पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बुधवार को कहा कि एआई के मामले में भारत प्रबल आशावाद और विश्वास दिखाता है, जबकि पश्चिमी देश इस उभरती तकनीक को लेकर चिंतित हैं। सुनक ने चेतावनी दी कि इस अंतर को पाटने के लिए लक्षित शासन प्रयासों की आवश्यकता है।
उन्होंने यहां चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में मेटा के मुख्य एआई अधिकारी अलेक्जेंडर वांग के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान कहा कि मुझे लगता है कि इस विश्वास के अंतर को कम करना जितना तकनीकी कार्य है, उतना ही नीतिगत कार्य भी है।
उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में, हम एआई के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण देख रहे हैं। भारत जैसे देशों में अपार आशावाद और विश्वास है, जबकि पश्चिमी देशों में, हम देख रहे हैं कि एआई के प्रति चिंता अभी भी हावी है।
सुनक ने आगे कहा कि भारत एक ऐसा देश है जिसके डिजिटल क्षेत्र में अपार महत्वाकांक्षाएं और क्षमताएं हैं, और हाल ही में हुए एआई निवेशों के असाधारण पैमाने को रेखांकित किया।
पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष, बड़ी एआई कंपनियां इस तकनीक को विकसित करने पर अमेरिका द्वारा मैनहट्टन प्रोजेक्ट (परमाणु बम निर्माण) पर खर्च किए गए पैसे से 20 गुना अधिक खर्च करने जा रही हैं।
वांग के अनुसार, हम इस समय प्रौद्योगिकी के लिए एक बेहद रोमांचक दौर में हैं। मुझे लगता है कि हम एक वास्तविक गति से विकास के शुरुआती चरण में हैं। उन्होंने वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव की सराहना करते हुए इसे एक बेहद सकारात्मक उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि भारत में अब अमेरिका की तुलना में अधिक उपभोक्ता एआई स्टार्टअप हैं।
वांग ने कहा कि एआई एक नए प्रतिमान में प्रवेश कर रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है। इस शिखर सम्मेलन में विश्व भर से नीति निर्माता, उद्योगपति, शिक्षाविद, नवप्रवर्तक और नागरिक समाज के प्रतिनिधि एक साथ आए हैं। -आईएएनएस
क्या आप जानते हैं गर्म दूध पीने के ये 7 फायदे
वक्ष का मनचाहा आकार पाएं
क्या देखा अपने उर्वशी रौतेला का गॉर्जियास अवतार