1 of 1 parts

पावन देवस्थलः जहां रावण वध के बाद श्रीरामचंद्र ने किया था प्रायश्चित, कटते हैं जन्मों के पाप

By: Team Aapkisaheli | Posted: 10 Mar, 2026

पावन देवस्थलः जहां रावण वध के बाद श्रीरामचंद्र ने किया था प्रायश्चित, कटते हैं जन्मों के पाप
सुल्तानपुर। भारत को मंदिरों का देश भी कहा जाता है, जहां कोने-कोने में एक से बढ़कर एक अद्भुत देवालय हैं, जो अपनी सुंदर बनावट, भक्ति और चमत्कार की कथा को कहते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत मंदिर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में स्थित है। यहां गोमती नदी में स्नान करने से जन्मों के पापों का नाश होता है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी के किनारे बसा धोपाप मंदिर और घाट आस्था, इतिहास और आत्मशुद्धि का अनुपम संगम है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने रावण वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर इसी स्थान पर गोमती नदी में स्नान कर प्रायश्चित किया था। तभी से इस जगह का नाम धोपाप पड़ा, जिसका अर्थ है पापों को धोने वाला। 

धोपाप मंदिर न केवल धार्मिक महत्व का केंद्र है, बल्कि इसका प्राकृतिक सौंदर्य भी मनमोहक है। गोमती के शांत बहाव, हरे-भरे किनारे और सौम्य वातावरण यहां आने वाले हर श्रद्धालु को अद्भुत सुकून प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग इस स्थल को आस्था और इतिहास के अनूठे संगम के रूप में प्रचारित कर रहा है। 

धार्मिक मान्यता है कि यहां डुबकी लगाने से मन के अपराध, कर्मों की अशुद्धियां और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती हैं, और भीतर गहरी शांति और पवित्रता का अनुभव होता है। धोपाप घाट गोमती नदी के दाहिने किनारे पर कादीपुर गांव में स्थित है। 

विष्णु पुराण में गोमती नदी को इस क्षेत्र में धुतोपपा के नाम से जाना गया है। नदी यहां एक लूप बनाकर दक्षिण-पूर्व में मोड़ लेती है, जिसके कारण यह स्थान और भी पवित्र माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि दशहरा या रामनवमी के दिन यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धोपाप में भगवान राम का एक सुंदर मंदिर है, जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। मंदिर परिसर में घाट पर स्नान करने के बाद भक्त दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। 

प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी गंगा दशहरा, चैत्र रामनवमी और ज्येष्ठ स्नान मेले के दौरान यहां भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है। इन अवसरों पर विशेष पूजा, हवन और कीर्तन का आयोजन होता है। लोग दूर-दूर से परिवार सहित आते हैं और गोमती में स्नान कर आशीर्वाद लेते हैं। धोपाप मंदिर सुल्तानपुर जिले के लम्भुआ विकास खंड में तहसील लम्भुआ के अंतर्गत आता है। 

सुल्तानपुर शहर से लगभग 32 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और अयोध्या से करीब 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धोपाप मंदिर सुल्तानपुर-जौनपुर रोड यानी एनएच-56 से आसानी से पहुंचा जा सकता है। लोहरामऊ मंदिर से यह स्थान मात्र 8 किलोमीटर दूर है। 

धोपाप मंदिर ट्रेन से पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन लम्भुआ जंक्शन है, जो सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, जयपुर, भोपाल और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। स्टेशन से मंदिर तक ऑटो या टैक्सी से 20-25 मिनट में पहुंचा जा सकता है। वहीं, सुल्तानपुर से लम्भुआ 22 किलोमीटर है, जो सुल्तानपुर-वाराणसी राजमार्ग पर पड़ता है। फैजाबाद से 60 किमी, प्रयागराज से 103 किमी, लखनऊ से 135 किमी, वाराणसी से 162 किमी और दिल्ली से लगभग 630 किमी की दूरी है। 

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें भी नियमित चलती हैं। मंदिर से निकटतम हवाई अड्डा इलाहाबाद (प्रयागराज) है, जो सुल्तानपुर से करीब दो घंटे की ड्राइव पर है। दूसरा विकल्प लखनऊ का चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो 148 किलोमीटर दूर है। दोनों एयरपोर्ट से टैक्सी या कैब बुक कर धोपाप पहुंचा जा सकता है। -आईएएनएस

#महिलाओं के शरीर पर  तिल,आइये जानते हैं   इसके राज


Sultanpur, Uttar Pradesh, Gomti River, Dhopap Dham, Lord Rama, Ramayana, Spiritual Cleansing, Solar Eclipse, Temple Architecture, Religious Tourism,

Mixed Bag

News

मेरी बेटी नाना-नानी की तरह स्टाइलिश होगी, मसाबा गुप्ता के पोस्ट पर उर्मिला मातोंडकर ने भी दी प्रतिक्रिया
मेरी बेटी नाना-नानी की तरह स्टाइलिश होगी, मसाबा गुप्ता के पोस्ट पर उर्मिला मातोंडकर ने भी दी प्रतिक्रिया

Ifairer