नवरात्रि विशेष : आदिशक्ति का दिव्य धाम, जहां माता सती का गिरा था शीश, अन्न की देवी के रूप में विराजती हैं माता
पावन देवस्थलः जहां रावण वध के बाद श्रीरामचंद्र ने किया था प्रायश्चित, कटते हैं जन्मों के पाप