अंडे के छिलकों से बनेंगी ठंडी ईंटें, अब भीषण गर्मी में भी एसी की जरूरत होगी कम
By: Team Aapkisaheli | Posted: 07 Sep, 2026
भीषण गर्मी और चढ़ते पारे के कारण घरों को ठंडा रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कंक्रीट और सामान्य ईंटों से बनी दीवारें दिनभर तेज धूप में तपती हैं और रात तक गर्मी कमरे के भीतर छोड़ती रहती हैं। इससे बचने के लिए लोग लगातार एसी और कूलर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे बिजली का बिल काफी बढ़ जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने एक बेहद अनोखा और टिकाऊ तरीका खोज निकाला है। अब किचन के कचरे में फेंके जाने वाले अंडे के छिलकों का इस्तेमाल करके ऐसी ईंटें बनाई जा रही हैं, जो घरों को अंदर से ठंडा रखने में मददगार साबित होंगी।
ईंट बनाने की आसान और अनोखी प्रक्रिया
अंडे के छिलकों से ईंटें बनाने की प्रक्रिया काफी वैज्ञानिक और रोचक है:सबसे पहले दुकानों और घरों से फेंके गए अंडे के छिलकों को इकट्ठा करके अच्छी तरह साफ किया जाता है।
सफाई के बाद इन्हें पूरी तरह सुखाकर बारीक पाउडर में पीस लिया जाता है।
इस पाउडर को खास मिट्टी में मिलाकर एक सही मिश्रण तैयार किया जाता है।
इस मिश्रण को सांचे में ढालकर लगभग 1100 डिग्री सेल्सियस के बेहद ऊंचे तापमान पर पकाया जाता है।
पकाने की इस प्रक्रिया के दौरान ईंट के अंदर छोटे-छोटे सूक्ष्म छिद्र बन जाते हैं।
50 प्रतिशत तक कम सोखेगी गर्मीअनुसंधान में पाया गया है कि मिट्टी में केवल 10 प्रतिशत अंडे के छिलके का पाउडर मिलाने से सबसे शानदार परिणाम मिलते हैं। इस खास अनुपात से बनी ईंटें सामान्य ईंटों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम गर्मी सोखती हैं। ईंट के भीतर मौजूद सूक्ष्म छिद्र हवा की आवाजाही में मदद करते हैं और बाहरी गर्मी को अंदर की तरफ तेजी से ट्रांसफर नहीं होने देते।
पर्यावरण और जेब दोनों को बड़ा फायदायह नई तकनीक दो तरह से पर्यावरण और आम जनता के लिए फायदेमंद साबित होगी:बिजली की बचत: जब दीवारें कम गर्म होंगी तो घर के अंदर का तापमान अपने आप कम रहेगा। इससे एसी और कूलर पर दबाव घटेगा और बिजली का बिल भी कम आएगा।कचरा प्रबंधन: दुनियाभर में रोजाना टन के हिसाब से अंडे के छिलके कचरे में फेंक दिए जाते हैं। इस तकनीक के जरिए खाद्य कचरे का सही और टिकाऊ उपयोग संभव हो सकेगा।
भविष्य की संभावनाएंफिलहाल यह तकनीक अनुसंधान और परीक्षण के दौर में है। निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उतारने से पहले इसकी मजबूती टिकाऊपन और पानी से बचाव जैसे मानकों की जांच की जा रही है। अगर यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है तो आने वाले समय में यह ईको-फ्रेंडली निर्माण सामग्री का एक बेहतरीन विकल्प बनेगी।
हेमलता शर्मा जयपुर
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