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यंग कपल नो सेक्स...

By: Team Aapkisaheli | Posted: 29 Sep, 2012

यंग कपल नो सेक्स...
शादी मे सेक्स का उतना ही महत्व है, जितना खाने मे नमक का। आखिर क्या कारण हैं,जो मॉडर्न कपल्स को बेस्वाद जीने पर मजबुर रहे हैं। एक पडताल। क्या पति-पत्नी का एक दूसरे को छूने का मन करता हैक् क्या वे अपनी इस इच्छा को दबा लेते हं या एक के छूने पर दूसरी तरफ से जबाब मिलता है,आज यह लल्लो चप्पो क्यों? हर रिश्ते मे जब प्यार से सहलाने या गले लगाने को बुरा समझा जाता,तो फिर लोग अपने दांपत्य रिश्ते मे दूरियं क्यों रखते हैं।
जिस दापंत्य रिश्ते को स्पर्श का सुकून नहीं मिलता उस रिश्ते मे सेक्स असरदार भूमिका कैसे निभा सकता है। स्पर्श से ही दिलकी बातों की शुरूआत होती है और वही सेक्स प्रक्रिया मे तब्दील होती है। पति-पत्नी आपस मे अपना प्यार दर्शाने से क्यों हिचकिचाते हैं? उनके बीच का प्यार और सीधे तौर पर कहें,तो सेक्स धीरे-धीरे क्यों खो जाता हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पति को मंजूरी इस आधार पर दी क्योंकि उसकी पत्नी शारीरिक संबध बनाने के लिए तैयार नहीं थी। कोर्ट का मानना था कि अगर पत्नी सेक्स संबंध बनाने से इनकार करती है,तो यह पति के साथ मानसिक क्रूरता है। पत्नी चाहती थी कि पति के साथ उसके शारीरिक संबंध तो ना बने पर शादी बनी रहे। पति का आरोप था कि पत्नी शदी की पहली रात से ही सेक्स संबंध के लिए मना करती रही है। इसलिए वह इस शादी से मुक्ति चाहता है।
इस मामले मे जस्टिस कैलाश गंभीर की राय थी कि यह कहना मुश्किल है कि एक स्वस्थ दंपती को एक निश्चित समय मे कितनी बार शारीरिक संबंध बनाने चाहिए, क्योंकि यह कोई मशीनी नहीं, बल्कि भावनात्मक प्रक्रिया है। पर इसमे कोई दो राय नहीं कि सेक्स संबंधो के बिना शादी अधूरी और फीकी रहती है। कोर्ट का यह भी कहना था कि शादी की सफलता के लिए सेक्स का सुखद होना बेहद जरूरी है। आज कई युवा दंपती शादीशुदा होने के बावजूद सेक्स लाइफ को ले कर दुविधा मे रहते हैं।
कभी अहं और कभी अपने खुदगर्ज सपनों की खातिर वे शादीशुदा जिंदगी से सेक्स को किनारे कर देते हैं। अगर सेक्स तलाशते भी हैं, तो शादी के बाहर नेट पर पोर्न साइटों और फसबुक पर लेकिन बगल मे बिस्तर पर लेटे साथी को देख कर ठंडे पड जाते हैं। मन में भावनाओं की गुनगुनाहट जैसे-जैसे धीमी हो कर गुम होती है वैसे ही प्यार से बात करना प्यार से छूना छोटी-छोटी बातों के दौरान एक दूसरे के हाथों को थामना,एक दूसरे को अहसास दिलाना कि वे एक दूसरे के साथ है या एक को दूसरे की जरूरत है, कम होता जाता है।

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