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शादियों में शोशेबाजी

By: Team Aapkisaheli | Posted: 12 Apr, 2012

शादियों में शोशेबाजी
जमाना है लेन-देन का, दिखावे का है। शोशेबाजी का यह दौर विवाह समारोहों में भी अपने जलवे दिखा रहा है। हर कोई अपने को दूसरे से बेहतर साबित करने के चक्कर में इन आयोजनों में पैसे को पानी की तरह बहाता है। इसी वजह से शादियां फार्म हाउस और पांच सितारा होटलों के लॉन में करने की होड सी लगी हुई है। अपनी हैसियत को बढा-चढा कर दिखाने के चक्कर में इस एक बडे दिन के लिए लोग बडे-बडे बिल तक भरने को तैयार हैं। इस तरह की शादियां मध्यम वर्ग या निम्न मध्यम वर्ग के उन लोगों में हो रही हैं, जो हाल-फिलहाल में अमीर हुए हैं। हरियाणा के कुछ गांवों में दूल्हे हैलीकॉप्टर से आते हैं व दुल्हन को हेलीकॉप्टर में बैठाकर लाते हैं।
शादी की मिठाई
शादी से पहले रिश्तेदारों में बांटे जाने वाले लड्डुओं, मя┐╜टयों-मखानों और पिя┐╜न्नयों की जगह रेडीमेट चॉकलेट्स, विदेशी खजूर और ड्राई फ्रूट्स ने ले ली है। इनके लिए खास पैकिंग तैयार करायी जाती हैं। इसी तरह गिя┐╜न्नयों और शगुन के तौर पर रूपए रखने के लिए आकर्षक पैकिंग तैयार कराने का दौर चल पडा है। सिल्क, शनील, ब्रोकेड या फिर किसी दूसरे कपडे की गुत्थी तैयार कर उस पर जरी-कोटा या मोती लगाए जाते हैं। अगर उस पर किसी नामी-गिरामी डिजाइनर का टैग लगा हो तो यह बहुत शान की बात समझी जाती है। गिफ्ट और मिठाई की पैंकिंग के लिए लकडी के डिब्बे और ट्रे का इस्तेमाल किया है। इनकी कीमत 150 रूपए से लेकर 5,000 रूपए तक प्रति डिब्बा है।
कार्ड
इसी तरह शादी का डिजाइन कार्ड भी शादी के शोशों में बहुत आगे निकल गया है। कार्ड बनाने वालों के पास लोग एक से एक अजूबा मांग ले कर आते हैं। उनके यहां प्रति कार्ड 10 रूपए से लेकर 1 हजार रूपए तक की कीमत में कार्ड मिल जाते हैं। विवाह के निमंत्रण पत्र को देखकर परिवार की हैसियत, पारिवारिक स्थिति, रूचि और मानसिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
शादी का न्योता
बदलाव की इस बयार में प्यार पर पैसा हावी हो चला है, तभी तो अब शादी का न्योता और विदेशी मिठाई कोरिअर के माध्यम से भेजने का ट्रेंड शुरू हो गया है। जिसे न्योता भेजा जाता है, वो भी बुलाने वाले की हैसियत भेजी गई मिठाई, उसकी पैकिंग और शादी के कार्ड से आंकता है।
सजावट
भले ही शादी 5 स्टार होटल, फार्म हाउस या समुद्र के किनारे हो, डेकोरेशन के नाम पर फ्लावर अरेंजमेंट और कैंडल अरेंजमेंट की भव्यता देखते ही बनती है। इन दोनों पर अच्छी खासी रकम खर्च होती है। विवाह समारोहों में फ्लोटिंग कैंडल से ले कर डिनर टेबल पर रखने तक के लिए खास किस्म की कैंडल लगायी जाती है। शादी के अवसरों के लिए खास तरह की कैंडल तैयार की जाती हैं जिनके जलने पर उनमें से मंत्रोच्चार की आवाज सुनायी देती है। एक कैंडल की कीमत 100 से लेकर हजारों रूपयों तक है। पिछले एक-डेढ साल से उच्चा मध्यम वर्ग भी इस ओर आकष्ात हुआ है। अब हर कोई अपने स्टेटस के हिसाब से कैंडल डेकोरेशन कराना चाहता है।
फ्लावर अरेंजमेंट
फ्लावर अरेंजमेंट पर भी हजारों-लाखों रूपए व्यय करना आम बात होती जा रही है। अब डेकोरेशन के नाम पर सिंगापुर और बैंकाक से खास फूल मंगवाए जाते हैं। फिर इन विदेशी फूलों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए खास अंदाज में तैयार किया जाता है।
व्यंजन
शादी है, तो व्यंजन तो तरह-तरह के परोसे ही जाएंगे। पर हरेक व्यंजन को खाना तो दूर अगर उनका स्वाद चखने के लिए एक सिरे से शुरू हो जाएं, तो दूसरे छोर तक पहुंचने से पहले ही चखते-चखते पेट भर जाए। पंजाबी, कश्मीरी, गुजराती, राजस्थानी व्यंजनों से लेकर थाई, चाइनीज, कॉन्टिनेंटल आदि तरह-तरह के व्यंजनों की भरमार होती है। चपाती के नाम पर तवा रोटी, तंदूरी रोटी, मिस्सी रोटी, भरवां रोटी, मक्की रोटी, बाजरा रोटी और ना जाने कितनी किस्म की रोटियां परोसी जाती हैं। यही हाल सलाद का भी होता है। फिर इतना ज्यादा खाना बच जाता है कि फेंकना पडता है। शोशेबाजी की अति तब होती है जब सारे कायदे-कानून ताक पर रख कर लडकियां शराब परोसती नजर आती हैं। शराब पीने के बाद लडाई-झगडे और बचकानी हरकतों से सारा मजा किरकिरा हो जाता है।
बारातियों का स्वागत
बारात के द्वार पर पहुंचने पर बारातियों को फूलों के हार पहनाने की बात समझ में आती है लेकिन अब बारात में नजदीकी रिश्तेदारों को उपहार के तौर पर विदेशी कंबलों के बैग, गिя┐╜न्नयां या सोने की चेन आदि दी जाने लगी हैं।
वेडिंग कोरियोग्राफर
अब शादियों में लेडीज संगीत में फिल्मी गीतों की धुनों पर नाचने का एक नया शौक अपने चरम पर है। इसके लिए वेडिंग कोरियोग्राफर से नाचने की ट्रेनिंग ली जाती है। पहले ढोलक और चम्मच की थाप पर लोक गीत गाने और नाचने का रिवाज था। जैसे ही ढोलक की थाप पडती, पैर स्वयं थिरक उठते। तब कौन सा कदम कहां पड रहा है, देखा नहीं जाता था, लेकिन अब नृत्य के दौरान सबके स्टेप्स आपस में मिलने चाहिए। इसकी वजह से विवाह से 15-30 दिन पहले खास फिल्मी गानों पर नाचने की ट्रेनिंग ली जाने लगी है।
डिजाइनर परिधान
अब दूल्हा-दुल्हन को डिजाइनर परिधान पहनाए जाने का फैशन चल पडा है। ये परिधान कम महंगे नहीं होते। विवाह से संबंधित जितने भी कार्यक्रम होंगे, दूल्हा-दुल्हन उतनी ही बार नया परिधान पहनेंगे। परिधान के साथ मैच करते हुए जूते या हील भी पहनी जाएगी। इसके अलावा एक मुश्त महंगा ब्यूटी ट्रीटमेंट अलग से लिया जाता है।
सुहागरात
दूल्हा-दुल्हन की पहली रात के लिए कमरा सजाने के लिए अपहोल्स्ट्री विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाने लगी हैं। ये विशेषज्ञ कमरे को स्वप्न लोक की तरह सजाते हैं। इसे सजाने के लिए एक से बढ कर एक सुंदर बेडशीट, बेड कवर, परदे आदि इस्तेमाल में लाए जाते हैं। भले ही नवविवाहित दंपती मध्यम आय वर्ग का हो, पर हनीमून मनाने के लिए विदेश जाना आम बात हो चली है। वो दिन दूर नहीं जब नवदंपती हनीमून के लिए मून पर जाना शुरू कर दें क्योंकि मामला शोशेबाजी का है।

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