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नाखून कराते हैं स्वस्थ होने का एहसास

By: Team Aapkisaheli | Posted: 05 May, 2012

नाखून कराते हैं स्वस्थ होने का एहसास
कुछ लोग नाखूनों की देखभाल पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। नाखून हमारी खूबसूरती का हिस्सा तो हैं ही, ये हमें स्वस्थ होने का भी एहसास कराते हैं। क्या आपको पता है कि नाखून मृत्यु के 2-3 दिन बाद तक बढते हैं। शोध से पता लगा है कि शिशु के नाखूनों का बनना मां के गर्भ में ही शुरू हो जाता है वहीं यह भी पता चला है कि मरने के बाद नाखूनों के आसपास के नर्म हिस्से संकुचित होने लगते हैं इसलिए नाखूनों के बढने का भ्रम होता है। बाल और नाखून स्किन के ही हिस्से हैं। देखने वाले तो औरत की खूबसूरती उसके सिर के बालों से लेकर पैर के नाखूनों तक देखते हैं। कुछ लोग तो ये तक कहते हंै कि गर्लफ्रेंड का मूड परखना हो तो उसके नेल्स देख लो। नाखूनों का निर्माण नेल मैट्रिक्स से होता है जो हमारी बॉडी में नाखूनों के पीछे वाले हिस्से में स्किन के नीचे होता है। नाखून बनने पर यह स्किन के नीचे से ऊपर की ओर निकल कर बढता है।
नाखून उंगली के जिस छोर पर खत्म होता है वह हिस्सा सी मार्जिन ऑफ नेल कहलाता है। शरीर के इस हिस्से को हम खुजलाने के काम लेते हैं। यह नेल प्लेट जिस जगह पर उंगली की त्वचा से जुडी होती है वहीं स्किन का बहुत ही महीन आवरण होता है व यह अंश क्यूटिकल्स कहलाता है। नाखूनों से पता चलती है बीमारी नाखूनों में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन आए तो स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो जाना चाहिए। हो सकता है आप को किसी नाखून का ऊपरी सिरा फटा दिखे या नाखून में पीलापन नजर आए या कभी नाखून चम्मच जैसा धंसा नजर आने लगे तो तुंरत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि ये तमाम लक्षण शरीर में बीमारी होने की संभावना भी दर्शाते हैं। अक्सर नाखूनों का रंग पीलिया,एनीमिया का संकेत देता है और नख्खूनों से ही फेफडों के कैंसर, दिल की बीमारी व थायरॉइड की गडबडी का भी पता चल जाता है। जो लोग बहुत अधिक समय तक पानी में काम करते हैं उन्हें नाखूनों की बीमारी हो जाती है जिसे उंगुलहरा कहते हैं।
ये एक प्रकार का फंगस होता है। फंगस के जनक बैक्टीरिया होते हैं। पानी में ज्यादा समय तक काम करते रहने पर नाखूनों की स्किन में सूजन आ जाती है और ये लाल रंग के हो जाते हैं। ऎसी स्थिति में स्किन नाखूनों से अलग हो जाती है। लगातार पानी लगने से स्किन में मवाद पड जाता है। इस बीमारी का इलाज है एंटीफंगल व इसके प्रयोग से नाखून ठीक होने में कम से कम 7 दिन तो लगते हैं। अगर पानी में काम करना जरूरी ही हो तो आप दस्ताने पहन कर काम कर सकते हैं। यह गलत धारणा है कि कैल्सियम की कमी ही नाखूनों से जुडी तमाम समस्याओं का कारण है अत: बेवजह कैल्सियम की गोलियां न लें। नाखूनों में कैल्सियम बहुत ही कम मात्रा में होता है और वह भी केवल ऊपरी हिस्सें में। नाखूनों में कैरोटीन प्रोटीन की बडी मात्रा होती है जो नाखूनों की आकृति, इसकी वृद्धि और बनावट में भूमिका निभाता है। शरीर में प्रोटीन की कमी होती है तब नाखून पतले, लंबाई में फटने लगते हैं।
नाखूनों में रक्तसंचार ठीक प्रकार से न होने पर नाखून अच्छे नहीं निकलते। कुछ लोगों के नाखून जन्म से ही नर्म और कोमल होते हैं। ऎसा शरीर में प्रोटीन की कमी के कारण होता है। सर्दी के मौसम में तो नाखून ज्यादा नहीं बढते लेकिन गर्मी के मौसम में नाखून अधिक बढते हैं। दाएं हाथ के नाखून बाएं हाथ के नाखूनों की तुलना में तेजी से बढते हैं और एक खास बात यह भी कि महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों के नाखून अधिक बढते हैं। पैरों के नाखूनों में दर्द टाइट या आग से नुकीले जूते पहनने वालों के पैरों की उंगलियों के नाखूनों में दर्द होने लगता है। ऎसा नाखूनों के कोनों के उंगलियों के मांस में धंसने से होता है।
ऎसे में नुकीले जूते न पहने।
1-नाखूनों को ठीक प्रकार से काटें तो यह समस्या नहीं होगी।
2- नाखूनों को काटकर नेल फाइल से कोनों को गोलाई दे दी जाए।
3-रात को अपने नाखूनों को गुनगुने ऑलिव ऑयल में भिगो कर हल्की मसाज करें, इससे नाखून स्वस्थ रहेंगे।
4-नियमित रूप से अपने नाखूनों पर नेल ऑयल या क्यूटिकल ऑयल से मसाज करें।
5- पेट्रोलियम जेली या कोको बटर का भी प्रयोग कर सकती हैं।

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