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मुझे तो मम्मी के साथ रहना है

By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Oct, 2012

मुझे तो मम्मी के साथ रहना है
यह एक स्वाभाविक स्थिति है। बच्चाा जन्म से ही मां को अपने ज्यादा करीब पाता है। उसकी सारी जरूरतें मां ही पूरा करती है। ऎसे में मां के प्रति बच्चो का अतिरिक्त लगात सामान्य सी बात है। धीरे-धीर बच्चो इस भाव को दर्शाना और कहना भी सीख जाते हैं। यह उनकी विकास अवस्था का हिस्सा है और वे समय के साथ रिश्तों की एहमियत व उनमें संतुलन भी सीख जाते हैं। यह सामान्य स्थिति तब समस्या में बदल जाती है, जब बच्चो की मां पर निर्भरता हद से ज्यादा बढ जाए, फिर चाहे वह दैनिक जरूरतों के लिए हो या भावनात्मक रूप में। मां के बिना बच्चो का कोई काम पूरा ना होता हो या मां की गैरमौजूदगी उसे परेशान कर देती हो, यहां तक कि बच्चो को मां का चिपकू कहा जाने लगे वह नए माहौल और नए लोगों के बीच सहज नहीं हो पाए और मां के पीछे दुबका रहता हो।
इस आदत को  बच्चो का विकास में अवरोध मानते हैं। इस व्यवहार से बच्चो के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता में कमी आती है। इसके पीछे मां पर उनकी निर्भरता, लगाव और असुरक्षाबोध होता है। वे डरते हैं कि कहीं उनकी सबसे करीबी मां उनसे दूर ना हो जाए और इसीलिए हमेशा उनके इर्द-गिर्द रहना चाहते हैं।
कई बार पिता की  बच्चो  की परवरिश में कम भूमिका भी बच्चो के इस व्यवहार के लिए जिम्मेदार होती है। बच्चो का अपनी मां के प्रति ज्यादा झुकाव कभी-कभी रिश्तों में मुश्किलें ला देता है। कई बार पितस बच्चो के ऎसे व्यवहार से आहत महसूस करते हैं और घर का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है।
यह कोई गम्भीर समस्या नहीं है। इसे सुलझाया भी जा सकता है...
सबसे बेहतर उपाय है बच्चो औरपिता के बीच की बांडिंग को मजबूत करना। पहले तो यह तय करना जरूरी है कि बच्चो का मां के प्रति लगाव सामान्य है या समस्या बन रहा है। सामान्य स्थिति में पिता इसे सहजता से लें, अपना व्यवहार परखें व बच्चो को टाइम दें। एक समय निर्धारित करें, जब बच्चाा सिर्फ पिता के साथ हो। चाहे वह सुबह हो या शाम, उनके साथ टहलने जाएं या कोइ खेल खेलें। बच्चो को पापा के साथ बाजार व रेस्टोरेंट भेजें। लौटने पर उसका अनुभव सुनें और कहें पापा के साथ तो अपने खूब मजे किए। बच्चाा पिता के साथ समय बिताने लगे, तो कुछ समय तक दूर से देखें, फिर खुद भी उनकी बतिविधियों में शामिल हों। पर तटस्थ भाव से।
बच्चो का पक्ष लेना, उसकी गलतियों को नजरअंदाज करना मांओं की आदत होती है, जिससे बच्चो उन्हें अपना रतरफदार मानकर पापा से कटने लगते हैं। अगर बच्चो का व्यवहार असामान्य हो रहा है, तो दोनों मिलकर उस पर नजर रखें। लेकिन बच्चो पर एकाएक मां से दूरी बनाने के लिए दबाव ना बनाएं। यह उसके लिए इमोशनल शॉक हो सकता है।

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