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दांपत्य जीवन और पारिवारिक रिश्ते

By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Dec, 2012

दांपत्य जीवन और पारिवारिक रिश्ते
महिलाओं के विषय में हम सभी यह जानते हैं कि वह पुरूषों की अपेक्षा अधिक भावुक होती हैं। सम्बन्धों में जरा सी भी लापरवाही वह सहन नहीं कर सकतीं। कोई भी महिला यह नहीं चाहती कि जिन संबंधों को वह अपने जीवन में सबसे ज्यादा एहमियत देती है, उनमें उसकी किसी गलती के कारण खटास पैदा हो यही वजह है कि वह अपने सभी सम्बन्धों के प्रति संजीदा दृष्टिकोण रखती है। निश्चित रूप से वैवाहिक जीवन में आपसी नहीं पारिवारिक सम्बन्ध ज्यादा एहमियम रखते हैं।

उत्तरदायित्व
महिला हो या पुरूष, वैवाहिक सम्बन्ध सभी के जीवन में बेहद अहम जगह रखते हैं लेकिन हम इस बात को कतई नकार नहीं सकते कि महिलाओं की सहनशीलता ही वैवाहिक सम्बन्ध को स्थायित्व प्रदान करती है। ऎसा भी नहीं है कि पुरूष अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझते। इसके विपरीत तथ्य साफ प्रदर्शित करते हैं कि विवाह के पpात पुरूष अपेक्षाकृत अधिक परिपक्व हो जाते है लेकिन फिर भी वह शारीरिक आकर्षण को ही अपनी प्राथमिकताओं में गिनते हैं। वहीं दूसरी ओर महिलाओं के लिए शारीरिक सम्बन्धपारिवारिक उत्तरदायित्वों के सामने गौण पड जाते हैं।

परिवार और बच्चे
इस सर्वेक्षण को अगर हम भारतीय पृष्ठभूमि में देखें तो यहां भी हालात ज्यादा भिन्न नहीं हैं। अधिकतर यह देखा जाता है कि एक निश्चित समय के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे से ज्यादा एहमियत परिवार और बच्चों को देने लगते हैं। परिवार के भीतर उनकी स्थिति कैसी है यह उनके ऎसे व्यवहार को और अधिक बढावा देता है। निश्चित तौर पर उन वैवाहिक जोडों पर जिम्मेदारियों का बोझ ज्यादा पडेगा जो संयुक्त परिवार में रहते हैं। ऎसे में घर के सभी सदस्यों की देख-रेख करना, उनकी जरूरतों का ख्याल रखना उनका सबसे पहला दायित्व बन जाता है। भले ही इन सब जिम्मेदारियों के चलते पति-पत्नी आपस में समय ना बिता पाएं लेकिन अपने बच्चों को वह पूरा समय देते हैं। इसके पीछे कारण यह नहीं है कि वह दोनों एक-दूसरे के साथ से ऊब चुके हैं। बल्कि उन दोनों के बीच इतनी समझ विकसित हो चुकी होती है कि अगर वह साथ समय ना भी बिता पाएं तो इससे उनके संबंध को कोई नुकसान नहीं होता। पत्नी हो या पति दोनों ही अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करते हैं, जिसमें उनका अधिकांश समय व्यतीत हो जाता है क्योंकि उनके लिए शारीरिक संबंध नहीं बल्कि परिवार की खुशी मायने रखती है।
सम्बन्धों की प्राथमिकता
एक नए अध्ययन के अनुसार यह बात प्रमाणित हुई है कि जब महिलाओं के ऊपर परिवार की जिम्मेदारियां आती हैं, तो वह अपने वैवाहिक जीवन और पति के साथ को भी इनके सामने महत्व नहीं देतीं। शारीरिक सम्बन्ध जो वैवाहिक जीवन को अधिक मजबूती प्रदान करता है, बच्चों और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए महिलाएं इस ओर भी ध्यान नहीं देती। अफ्रीका के जॉन हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल के शोधकर्ताओं ने यह प्रमाणित किया है कि महिलाओं की परिवार के प्रति जिम्मेदारियां बढने के साथ उनका शारीरिक सम्बन्धों के प्रति रूझान समाप्त होने लगता है।

इस स्टडी की मुख्य शोधकर्ता मिशेल हिंडिन का कहना है कि संबंध स्थापित ना करना महिलाओं का अपना निर्णय होता है, हालांकि कई बार पति-पत्नी दोनों ही अपनी जिम्मेदारियों के चलते यह निर्णय लेते हैं लेकिन मुख्य तौर पर महिलाएं, जिनके ऊपर घरेलू जिम्मेदारियां पुरूषों से ज्यादा होती हैं, ही स्वयं शारीरिक सम्बन्ध बनाने या फिर पति के साथ रूमानी पल बिताने के प्रति उदासी रहती हैं।

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