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शादी के लड्डू की मिठास

By: Team Aapkisaheli | Posted: 24 Oct, 2012

शादी के लड्डू की मिठास
विवाह दो लोंगो के दिलों का मिलन है। इंसान की जिन्दगी में शादी सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता होता है क्योंकि इसके बाद इंसान की जिन्दगी पूरी तरह से बदल जाती है। हिंदू व इस्लाम धर्मशास्त्रों में विवाह या निकाह को पवित्र, मधुर और जटिल रिश्ता माना गया है। आइये जानते हैं कि ऎसे भला क्या कारण हैं जिसके लिए जिन्दगी में विवाह का होना बहुत महत्वपूर्ण है।
एक साथी का साथ जिन्दगी
हर मोड पर, सुख-दुख में साथ निभाने के लिए एक साथी मिल जाएगा। आपका अपना खुद का एक घर और परिवार होगा जिसे आप अपने मन मुताबिक चलाएंगी।
सुरक्षित हो जाएंगी जिन्दगी
शादी करने के बाद मन से असुरक्षा की भावना बिल्कुल दूर हो जाती है। कहीं जाना हो या फिर कोई भी कार्य करना हो, तो उसके लिये पचास बार सोंचना नहीं पडेगा। आपका पति हर वक्त आपके साथ बॉडीगार्ड की तरह रहेगा।
खुद के घर में जिम्मेदारी का एहसास आएगा
अब जिन्दगी पहले जैसी नहीं रहेगी। मां-बाप की छांव से निकल कर जब आप अपने खुद के घर में आएंगी, तो आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होने लगेगा। बेफिजूल पैसे ना उडाना और खुद के काम अपने आप करने जैसी तमाम बातें सामने आएंगी।
नए परिवार से मिलन
शादी कर के आप समाज से जुडना सीख जाएंगी। शादी के बाद आप बहुत से नए रिश्तों से जुडेंगी जिन्हें निभाने का अपना अलग ही मजा होगा। इस दौरान आपके दो परिवार हो जाएंगे जिसमें नए लोग मिलेंगे जो आपको रोज नई-नई बातें बताएगें। आपको एक अलग सा एक्सपीरियंस होगा।
हर परेशानी शेयर होगी
जिन्दगी में एक पल ऎसा आता है जब हमें लगता है कि हम अपनी फीलिंग को किसी के साथ बांटे। ऎसे में हम अपने मां-बाप के अलावा भी किसी अन्य की चाह रखने लगते हैं। अगर आप शादी करेंगी तो जिन्दगी भर आप कभी अकेला महसूस नहीं करेंगी, क्योंकि आप का साथ निभाने के लिये आपका पाटर्नर मौजूद रहेगा। अपनी मुश्किलें, दुख-सुख उन्हीं के साथ बांट सकती हैं।
ममा बनने की खुशी ही कुछ ओर है
औरत का शादी करना सही मायने में तब पूरा होता है जब वह मां बनती है। हर औरत चाहती है कि उसका खुद का घर हो, बच्चे हों जिनका वह ख्याल रख सके और खूब सारा प्यार-दुलार दे सके। मां बनना एक सच्ची खुशी होती है।
बच्चो होते हैं बुढापे का सहारा
बुढापे में इंसान का सबसे बडा सहारा उसका बच्चा होता है, जिस पर वह आंख मूंद कर भरोसा कर सकता है। अगर शादी नहीं करेंगी तो बुढापे के वक्त कोई सहारा देने वाला नहीं होगा। आजकल कि मतलबी दुनियां में आप किसी भी रिश्तेदार पर विश्वास नहीं कर सकती।

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