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ग्रुप डेटिंग

By: Team Aapkisaheli | Posted: 16 July, 2012

ग्रुप डेटिंग
ग्रुप डेटिंग सेफ होता है और पोकिट फ्रेन्डली भी। एक दूसरे को समझने के लिए एकांत जरूरी है, यह फंडा पुराना हो गया है, क्योंकि पहले जिन बातों को युवा पार्को या रेस्तराओं में करते थे वे आजकल मोबाइल फोन पर आराम से हो जाती हैं इसके बाद मिलने-जुलने और मौजमस्ती, जो मोबाइल पर नहीं हो सकती है, उसके लिए ग्रुप डेटिंग बेहतर ऑप्शन है। आजकल ग्रुप डेटिंग बेहद आम बात हो चली है, जिस में 3 या इस से भी ज्यादा जोडे एक साथ किसी भी पिकनिक स्थल पर या दूसरे शहर में जा कर रूबरू हो कर एक दूसरे को समझते हैं। फिर जब प्यार, जानपहचान, दोस्ती का एक मीठा एहसास लेकर लौटते हैं, तो उनके दिलो दिमाग पर छाया डर और संदेह का धुंधलका हद तक छंट चुका होता है।
फायदा
ग्रुप डेटिंग का पहला फायदा युवा के अनुसार इससे पैसे की बचत होती है। खासतौर से उनके लिए जो बेरोजगार होते हैं और उनके लिए भी यह फायदे का सौदा है जो किसी जॉब में हैं। इससे बडा फायदा सुरक्षा और बेफिक्री का है लडका-लडकी अकेले जाएं तो स्वाभाविक रूप से डरे-डरे से रहते हैं, हर आती-जाती निगाह उन्हें एक खास तरह से घूरती है, जिससे वे असहज होने लगते हैं। पार्क में हों अथवा रेस्तरां में इन नजरों से बचने का कोई तरीका मौजूद नहीं, फिर असहज हो जाने पर वे दिल की बातें भी नहीं कर पाते हैं। पे्रमियों पर मंडराते खतरे जगजाहिर हैं। मनचले और पेशेवर अपराधी उनकी कमजोरी ताड कर अपनी पर उतारू हो जाते हैं और फिर कई बार अनहोनी भी घट जाती है। कट्टरवादी संगठनों के क ार्यकर्ता तो वेलेंटाइन डे जैसे खास दिनों में उनका जीना दूभर कर देते हैं। युवा प्यार अभी भी खुलेआम या घर वालों की जानकारी अथवा मंजूरी से नहीं करते हैं, इसलिए किसी अनहोनी के बाद नाम उजागर हो जाने से डरते हैं। लडकियाँ कितनी भी मॉडर्न क्यों ना हो गई हों शुरू में अभी भी झिझकती हैं पर ग्रुप में यह संकोच खत्म हो जाता है।
सभी घन्टे दो घन्टे में इतना घुलमिल जाते हैं कि लगता है जैसे सालों से एक दूसरे को जानते हैं। हंसी मजाक, जोक्स, गाने वगैरह का दौर भी चलता है। और यही हम चाहते हैं कि एक दूसरे को एकांज के अलावा समूह में भी समझें, जिसमें में पार्टनर की खूबियों और कमियाँ खुलकर सामने आ जाती है। माता पिता से इजाजत मिल जाए तो ग्रुप डेटिंग का मजा और भी बढ जाता है। शायद ऎसा इसलिए कि मन में बैठा अपराधबोध का भाव खत्म हो जाता है और संयम में रहने की नैतिक जिम्मेदारी भी बढ जाती है, इसलिए अभिभावकों को ग्रुप डेटिंग की इजाजत देने से परहेज नहीं करना चाहिए। नहीं देंगे तो संतान को चोरीछिपे अपने साथी से मिलने को ही उकसाएंगे।
ग्रुप डेटिंग को सामूहिक आवारवगी नहीं कहा जा सकता। युवाओं के प्यार और दोस्ती पर नाकभौं परंपरावादी और रूढिवादी लोग हमेशा सिकोडते रहे हैं और अब अभी भी सिकोडते हैं पर गु्रप डेटिंग में उनकी परवाह या लिहाज को कोई जगह नहीं और वैसे भी आज के युवा कीजिंदगी का पहला ऎम कैरियर है, जिसमें प्यार समानांतर चलता हरता है और जिससे प्यार करें उसी से शादी करें या अनिवार्यता भी खत्म होती जा रही है। रोमांटिक उम्र में रोमांस को जीने के लिए उन्हें जो अनुकूलताएं चाहिए वे गु्रप डेटिंग में सुविधाजनक तरीके से मिल जाती हैं। इसलिए खासतौर पर युवतियों की ग्रुप डेटिंग फस्ट पसंद बनती जा रहीं है।

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