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कन्याओं को जन्म लेने दो

By: Team Aapkisaheli | Posted: 09 May, 2012

कन्याओं को जन्म लेने दो
कन्या भ्रूण हत्या की समस्या देश के हर कोने में व्याप्त है। इसका कारण दहेज की बढती मांग है। बेटियां माता-पिता को सामाजिक सुरक्षा नहीं दे पातीं, वरन उम्र भर उन्हें उन पर पैसा खर्च करना पडता है और सारा लाभ उनके ससुराल वाले उठाते हैं। हालांकि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सरकार ने कई कानून बनाए तथा कई सुविधाएं जैसे लडकियों के लिए मुफ्त शिक्षा, दहेज पर रोक, उन माता-पिता के लिए पेंशन जिनका बेटा नहीं है, महिला आरक्षण तथा सम्पत्ति में बराबर अधिकार आदि भी लागू किए, पर फायदा सौ फीसदी नहीं हुआ। दुख की बात तो ये है कि लडकियों के एक मुकाम बनाने के बावजूद सबसे अधिक प्रीनेटल सेक्स टेस्ट कराए जाते हैं। पिछले 2 दशकों से लडके व लडकी के बीच का अनुपात लगातार बढता जा रहा है।
बेटे की चाह और उसे लेकर लोगों में अत्यधिक उत्साह दिखाई देता है, जिसकी वजह से या तो जन्म लेने से पहले ही लडकी को मार दिया जाता है या जन्म लेने के बाद उसे उसके हक नहीं दिए जाते। सरकार ऎसे डाक्टरों को भी गिरफ्त में ले रही है, जो लिंग परीक्षण करते हैं और उसके बाद गर्भपात। यहां तक कि सरकार ने उन गांवों की परिषद को भी इनाम देने की घोषणा की है जहां लिंग अनुपात समान होगा। पर्यावरण व कन्या भ्रूण को नष्ट न करने के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार ने एक कार्यक्रम के अंतर्गत कहा, पेड व लडकियां उसी तरह महत्वपूर्ण है जैसे ऑक्सीजन, जिसकी वजह से हम सांस ले पाते हैं या धरती, जो हमें भोजन देती है। जरूरी है कि हम सही ढंग से उनका पालन-पोषण कर उन्हें उचित सम्मान दें, हमारे इस प्रयास से लोगों के मन में उनके प्रति आदर भाव बढेगा और वे न तो कन्या भ्रूण हत्या करेंगे, न ही पेड काटेंगे। हमारी कोशिश देश के कोेने-कोने तक इस कार्यक्रम को पहुंचाने की है।
यह कितने दुख की बात है कि जो औरत उम्रभर प्यार बांटती है, हर भूमिका में अपने को हर पल समर्पित करने को तत्पर रहती है, उससे उसके जन्म लेने का अधिकार तक छीन लिया जाता है। समाज उसे ऎसा बोझ मानता है जिसे लोरी सुनने का अधिकार तक नहीं है। जरूरी है कि इन नन्हीं कलियों को बचा कर इन्हें वह छांव दी जाए जिसकी वे अधिकारी हैं। आखिर वह लडकी बोझ कैसे हो सकती है, जो अपने कंधों पर हर तरह की मुश्किल ले लेती हैक् जो अपने परिवार के लिए अपनी खुशियों को दांव पर लगा देती हैक् इतने अच्छे काम को आरंभ करने के लिए हर लडकी को एक-एक पौधा भी मिलेगा। यही नहीं घर-घर जाकर लोगों को इस बात के लिए भी प्रोत्साहित किया रहा है कि जब भी उनके घर में कन्या का जन्म हो या नयी बहू आए, तो एक पौधा अवश्य लगाया जाए ताकि उस बच्चाी के साथ वह भी बडा हो। वह पौधा बडा होकर ठंडी छांव देगा और वह लडकी नए घर जाकर उसे सुख से पुष्पित करेगी। इस तरह न सिर्फ लडकियों को बचाया जा सकेगा वरन वातावरण को भी प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा।
आज अगर हम पौधे लगाएंगे तो आने वाली पीढी को भी इस पवित्र कार्य को करने व इस उद्देश्य को आगे बढाने की प्रेरणा मिलेगी। समय रहते अगर हमने अपनी बя┐╜च्चायों व धरती मां की कद्र नहीं की तो इंसान का जीवन किसी बंजर भूमि से कम नहीं होगा। बя┐╜च्चायों व पेडों की सुरक्षा को एक सामाजिक दायित्व मानते हुए इस अभियान में हर वर्ग के लोगों को बढ-चढ कर हिस्सा लेना चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या एक व्यापक सामाजिक कलंक बनता जा रहा है जिसकी वजह से आने वाले समय में लिंग अनुपात में भारी कमी आ सकती है। दूसरी ओर, लगातार पेडों के कटते रहने से पर्यावरण का असंतुलन बढ रहा है, जिसकी वजह से ओजोन लेयर लगातार नीचे आती जा रही है। इन दोनों विषयों पर हमें आज गंभीरता से सोचने व आम आदमी तक इस संदेश को पहुंचाने की आवश्यकता है।

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