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ऎक्टिव मदर

By: Team Aapkisaheli | Posted: 09 Jun, 2012

ऎक्टिव मदर
मां! बच्चा जब पहला शब्द बोलता है तो उसके मुख से यही शब्द पहले निकलता है। इस शब्द का प्रभाव और आगाज इतना प्रभावी होता है कि उसके लिए पूरी दुनिया उसकी मां होती है। हर समस्या, हर इच्छा और हर क्षण उसके लिए अन्नापूर्णा के रूप में होती है मां। लेकिन बदलती सामाजिक परिस्थितियों और उफनते पाश्चत्य विचारों के कारण आज मां का अर्थ बदल गया है।
न सिर्फ मां शब्द का अर्थ बदला बल्कि मां स्वयं भी बदल गई। अब वह पहले की तरह साधारण सी मां नहीं रही, बल्कि वह मां से मॉम बन चुकी हैं। आज के समय की मां सिर्फ घर पर रह कर बच्चो की ही देखभाल नहीं करती, वह अब घर से बाहर रहकर, मां होने वह अपने सारे दायित्व को अच्छी तरह से निभा रही हैं। वैसे भी कहा जाता है कि बच्चो की प्रथम दोस्त, टे्रेनर, टीचर व गाइड मां ही होती है वही सब कुछ अच्छे बच्चो को समझती और सिखाती है, लेकिन पहले और अब में सिर्फ इतना अंतर आया है कि बच्चों की जरूरतें व आवश्यकताओं को पूरा करने के तरीके बदल से गए हैं। मां आज बच्चो के आराम का खयाल दूसरे ढंग से रखती है। उन की सुविधाओं की चिंता करने का उस का तरीका भी अलग है।
बच्चो की पढाई लिखाई में मदद
ऑफिस जाने के बावजूद मां की अपने बच्चो के प्रति पूरी कोशिश रहती है कि वह बच्चे की रूचियों का ख्याल रखते हुए उसका कैरियर बनाने में हैल्प करे। आज के समय की मां बहुत ही मजबूत और इरादों की पक्की हैं। अब मां का भी मन अंदर से मजबूत है वह जानती है कि उस के बच्चो के लिए भविष्य को सुरक्षित करना कितना अहम है। इसलिए वह अपनी ममता को पूरी तरह से त्याग कर अपने लाडले को पढाई करने के लिए दूर देश-विदेश तक भेज देती है साथ ही अपना पूरा सहयोग भी देती हैं।
बच्चो की पहली दोस्त मां
आज के टाइम में बच्चों को मां का साथ इतना मिलता है कि स्कूल, कॉलेस से शाम को फिर अपना घर संभालती है, अगर बच्चो से कोई गलती हो जाती है तो डांटती या सजा नहीं देती हैं। बच्चो को बहुत ही प्यार से समझाती है, ताकि अगली बार गलती हो जाने पर बच्चा अपनी मां से आ कर कहे और उसे तुरंत मान लें। बच्चो अपनी मां के बेहद करीब होते हैं। कि वे अपने स्कूल, कॉलेज व दोस्तों से जूडी हर एक बात वे मां से ही शेयर करते हैं। इसलिए मां बच्चो की सबसे अच्छी दोस्त बन जाती हैं।
नई तकनीक से पहचान
इस आधुनिक समय में मां अपने बच्चो को हर तकनीक से जागरूक करना चाहती है, वे बच्चो को हर तकनीक से जोडना चाहती है। इसके लिए वे बच्चो के प्रोजैक्ट कंप्यूटर पर पूरा कराती हैं, ई लर्निग आनलाइन क्लासेज दिलवाती है। चैटिंग, सोशल नैटवर्किग सिखाती है, उनके साथ वीडियो गेम भी खेलती है।
स्मार्ट मां
आये दिन बच्चो के खाने पीने में नखरे होते रहते हैं। इसलिए मां को रोज कुछ ना कुछ खाना बना ही पडता है सब्जी रोटी तो वह खाना पसंद ही नहीं करते, बाजार के खाने व जंक फूड में ही माजा आता हैं। घर के बने खाने में उन्हें टेस्ट नहीं आता। जिस के खाने के बाद उनकी सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पडता है। इसलिए मां को पता है, कि उसके बच्चो की सेहत के लिए क्या अच्छा होता है और क्या बुरा। वह घर के खाने को इतना स्वादिष्ठ बना देती है कि बच्चा खाने के लिए छड से राजी हो जाता है।
बच्चो को अचछे संस्कार देती है
हर पुरानी बात रूढिवादी नहीं होती। हमारी परंपरा में कई ऎसी बातें हैं, जिन्हें जानना और समझना बहुत जरूरी है। हमारे त्योहार व उनसे जुडे कई किस्से कहानियां ऎसी हैं, जिनसे मां अपने बच्चो को बहुत कुछ सीखा सकती है। बच्चो को कितना भी आधुनिक क्यों न बना लें, लेकिन वे उन्हें परंपराओं के हिसाब से रहना जरूर सीखती है। बडे-छोटे से कैसे बात करनी चाहिए, बच्चो को बडों के पैर छूने साथ ही उनका आदर करना चाहिए। मां ये सब बचपन से ही विकसित करती हैं।

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