पहली तिमाही में रिटेल सेक्टर में डील्स की रफ्तार तेज; 21 प्रतिशत उछाल, कुल वैल्यू 1.5 अरब डॉलर: रिपोर्ट

By: Team Aapkisaheli | Posted: 20 Apr, 2026

पहली तिमाही में रिटेल सेक्टर में डील्स की रफ्तार तेज; 21 प्रतिशत उछाल, कुल वैल्यू 1.5 अरब डॉलर: रिपोर्ट

बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 

भारत के रिटेल सेक्टर में 2026 की पहली तिमाही (क्यू1) में डील्स की संख्या में अच्छी बढ़त देखने को मिली है। सोमवार को जारी ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान कुल 146 सौदे (डील्स) हुए, जिनकी कुल वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही। इसमें एक पब्लिक मार्केट ट्रांजैक्शन भी शामिल है, जो मूल्यों में भारी गिरावट के साथ-साथ मात्रा में सुधार का संकेत देता है। 

डील्स की संख्या के हिसाब से यह 21 फीसदी की बढ़त है, क्योंकि पिछली तिमाही में 120 डील्स हुई थीं। हालांकि, कुल वैल्यू में करीब 55 फीसदी की गिरावट आई है, जो पहले 3.4 अरब डॉलर थी। इसका मतलब है कि इस बार बड़े सौदों की कमी रही और ज्यादा छोटे स्तर की डील्स हुईं। 

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस तिमाही में निवेशकों ने सावधानी से निवेश किया और ज्यादा फोकस सोच-समझकर डील करने पर रहा। वहीं, विदेशों में निवेश (आउटबाउंड एक्टिविटी) बढ़ने से भी डील्स को सपोर्ट मिला। कुल डील वैल्यू का 57 फीसदी हिस्सा सिर्फ टॉप 5 विलय और अधिग्रहण (मर्जर एंड एक्विजिशन - एमएंडए) और प्राइवेट इक्विटी (पीई) डील्स से आया, जिससे बड़े सौदों की अहमियत साफ दिखती है। 

सेक्टर के हिसाब से पर्सनल केयर और फूड प्रोसेसिंग में निवेशकों की दिलचस्पी सबसे ज्यादा रही, जिसकी वजह लोगों की बदलती पसंद है, जहां अब हेल्थ, सुविधा और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। एमएंडए सेगमेंट में इस अवधि के दौरान 40 डील्स हुईं, जिनकी वैल्यू 358 मिलियन डॉलर रही, जो 2025 की चौथी तिमाही में हुए 34 डील्स से 18 प्रतिशत अधिक है। 

लेकिन वैल्यू में 33 फीसदी की गिरावट आई और यह 532 मिलियन डॉलर रही। इसमें घरेलू कंपनियों के बीच एकीकरण बड़ी वजह रहा, जिसमें फूड प्रोसेसिंग, पर्सनल केयर और एफएमसीजी सेक्टर ने एमएंडए डील्स में क्रमशः 13, 10 और 8 डील्स के साथ बढ़त बनाई। वहीं, वैल्यू के हिसाब से पर्सनल केयर सेक्टर 155 मिलियन डॉलर के साथ आगे रहा। इसके अलावा, प्राइवेट इक्विटी (पीई) सेगमेंट भी मजबूत बना रहा, जहां 105 डील्स हुईं जिनकी कुल वैल्यू 1.1 अरब डॉलर रही, जो डील्स की संख्या में 22 फीसदी की बढ़त दर्शाता है। 

एफएमसीजी सेक्टर ने पीई निवेश में 347 मिलियन डॉलर के साथ बढ़त बनाई, जबकि फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में 8 डील्स के जरिए 257 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में निवेशकों का रुझान मिड-साइज और ग्रोथ-स्टेज कंपनियों की ओर ज्यादा रहा। साथ ही छोटे टिकट साइज की डील्स में बढ़ोतरी देखने को मिली। ई-कॉमर्स और नए उभरते कंज्यूमर ब्रांड्स में भी निवेश जारी रहा, खासकर डिजिटल और हेल्थ-फोकस्ड बिजनेस में। 

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर नवीन मलपानी ने कहा कि 2026 की पहली तिमाही में रिटेल सेक्टर में संतुलित रिकवरी देखने को मिल रही है। डील्स की संख्या बढ़ रही है, लेकिन निवेश अभी भी चुनिंदा जगहों पर ही किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब कंपनियां मुनाफे पर आधारित ग्रोथ, प्रीमियम प्रोडक्ट्स और मजबूत ब्रांड रणनीति पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, और निवेशक भी उन्हीं सेक्टर्स में पैसा लगा रहे हैं जहां स्थिरता और बेहतर कीमत तय करने की क्षमता है।

हालांकि, टेक्सटाइल और अपैरल जैसे सेक्टर्स में डील्स की संख्या तो बनी रही, लेकिन वैल्यू कम रही। वहीं रिटेल टेक और कंज्यूमर सर्विसेज में गतिविधि थोड़ी कमजोर रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राइवेट इक्विटी ने इस तिमाही में सबसे ज्यादा योगदान दिया और मजबूत व लाभकारी बिजनेस में निवेश का ट्रेंड जारी रहा। -आईएएनएस

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