निशा मिलेट : पानी से डरने वाली लड़की ने तैराकी में देश को दिलाया गोल्ड

By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Mar, 2026

निशा मिलेट : पानी से डरने वाली लड़की ने तैराकी में देश को दिलाया गोल्ड
नई दिल्ली। निशा मिलेट का नाम देश के लोकप्रिय और सफल तैराकों में लिया जाता है। निशा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत देश का नाम रोशन किया है। निशा मिलेट का जन्म बेंगलुरु में 20 मार्च 1982 को हुआ था। तैराकी में अपना करियर बनाने वाली निशा बचपन में पानी से डरा करती थीं। 5 साल की उम्र में वह डूबने से बाल-बाल बचीं। 

इस घटना के बाद उनके पिता ऑब्रे ने उन्हें तैराकी सिखाने का फैसला किया ताकि वह अपने डर पर काबू पा सकें। 1991 में चेन्नई के शेनॉयनगर क्लब में उन्होंने अपने पिता के मार्गदर्शन में स्विमिंग शुरू की। डर को भगाने के लिए शुरू हुआ तैराकी का सफर कब पैशन में बदल गया, इसका पता निशा को भी नहीं चला। 

निशा ने तैराकी में कड़ी मेहनत शुरू की और 1992 में उन्होंने 50 मीटर फ्रीस्टाइल में अपना पहला स्टेट लेवल मेडल जीता। 1994 में, सब-जूनियर रहते हुए ही उन्होंने सीनियर नेशनल लेवल पर पांचों फ्रीस्टाइल इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंका दिया। इसी साल उन्होंने हांगकांग में एशियन एज ग्रुप चैंपियनशिप में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मेडल भी हासिल किया। 

निशा मिलेट ने 1998 के एशियन गेम्स, 1999 और 2004 की वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित कई बड़े टूर्नामेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने एफ्रो-एशियन गेम्स और सैफ गेम्स में भी कई पदक जीते। 1999 के नेशनल गेम्स में उन्होंने 14 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। 

निशा ने 1999 में काठमांडु में आयोजित दक्षिण एशियाई खेल में तैराकी में 50 मीटर, 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर फ्रीस्टाइल में और 100 मीटर और 200 मीटर बैकस्ट्रोक में गोल्ड जीता था। उनके करियर का सबसे बड़ा पड़ाव 2000 का सिडनी ओलंपिक रहा, जहां उन्होंने 200 मीटर फ्रीस्टाइल में हिस्सा लिया और अपनी हीट जीतकर शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि वह सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकीं। वह ओलंपिक के लिए बी क्वालिफिकेशन टाइम हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला तैराक बनीं। 

उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर फ्रीस्टाइल में 15 साल तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम रखा। साथ ही, वह 100 मीटर फ्रीस्टाइल में एक मिनट का बैरियर तोड़ने वाली पहली भारतीय महिला भी बनीं। 2002 में पीठ की सर्जरी के बाद उनका करियर प्रभावित हुआ। 2004 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने से मामूली अंतर से चूकने और आर्थिक दबावों के चलते, उन्होंने प्रतिस्पर्धी तैराकी से संन्यास ले लिया। संन्यास के बाद वह अपने नाम से तैराकी अकादमी चलाती हैं। -आईएएनएस


लडकों की इन 8 आदतों से लडकियां करती हैं सख्त नफरत

घरेलू उपाय से रखें पेट साफ

गर्लफ्रैंड बनने के बाद लडकियों में आते हैं ये 10 बदलाव


Mixed Bag

Ifairer