सीईसी ने SIR के जरिए जनता से किया धोखा, भाजपा क्यों कर रही बचाव : प्रियंका चतुर्वेदी
By: Team Aapkisaheli | Posted: 29 , 2026

पॉलिटिकल डेस्क। नई दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की रणनीति को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक पर सियासत तेज हो गई है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर चुनाव आयुक्त को बचाने के आरोप लगाए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जिस तरह से दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने के भीतर 14 बार आपत्ति जताई है, वह अपने आप में बेहद चिंताजनक है। ये सभी आपत्तियां एसआईआर से जुड़ी हुई हैं। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है। बिहार से लेकर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक, जहां-जहां एसआईआर की प्रक्रिया हुई है, जिस तरीके से हुई है, उसने देश के हर नागरिक को कतार में खड़ा कर दिया है। ऐसा लगता है जैसे हर नागरिक पर शक किया जा रहा है कि वह शायद इस देश का नागरिक ही नहीं है। इसके कई उदाहरण सामने आए हैं।
उन्होंने कहा, खुद एक चुनाव आयुक्त को भी इस संबंध में नोटिस आया था। मुंबई में मेरे परिवार के सारे दस्तावेज देने के बावजूद हमें भी नोटिस मिला है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरी प्रक्रिया किस तरह से चल रही थी। जब खुद चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने ही इस मनमानी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, तो यह स्पष्ट है कि प्रक्रिया में बड़ी खामियां हैं। आखिर भारतीय जनता पार्टी इस कदर चुनाव आयुक्त को बचा क्यों रही है?
उन्होंने कहा, आज अगर मनमानी करते हुए विपक्ष के पीछे पड़ा जा रहा है, जनता को कतार में खड़ा किया जा रहा है, तो कल यही निशाना सत्तापक्ष पर भी साधा जा सकता है। इसलिए इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना चाहिए और देश को बताना चाहिए कि किस आधार पर और किसके कहने पर एसआईआर की यह पूरी प्रक्रिया इस तरह से की गई।
दिल्ली में मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा एक युवक को थप्पड़ मारने के मामले पर भी प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ सिर्फ एनसीआर दर्ज की है, जबकि आम आदमी पार्टी के विधायक जरनैल सिंह पर एफआईआर दर्ज कर दी गई है। इससे साफ पता चलता है कि किस तरह भेदभावपूर्ण तरीके से काम हो रहा है। जब जनता का दबाव बढ़ा, तब जाकर कार्रवाई की गई। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली की जनता अपने विवेक का इस्तेमाल करेगी और समझेगी कि दिल्ली पुलिस से हम उम्मीद करते हैं कि वह कानून-व्यवस्था को सबसे आगे रखेगी, लेकिन वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बजाय सरकार को बचाने में लगी हुई है।
उन्होंने 2000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी तौर-तरीकों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, लेकिन अब वित्त मंत्रालय की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह देश की जनता को स्पष्ट बताए कि इस अतिरिक्त शुल्क का भुगतान कौन करेगा। अगर 2000 रुपए से ज्यादा खर्च पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा, तो उसका बोझ कौन उठाएगा? क्या छोटे एमएसएमई दुकानदार, रिटेल दुकानें, हैंडलूम वर्कर, किसान और छोटे कारोबारी जो 2000 रुपए से अधिक का यूपीआई इस्तेमाल करते हैं, वे इसका भुगतान करेंगे? सबसे बड़ी चिंता यही है कि इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
उन्होंने कहा कि चांदनी चौक से लेकर मुंबई तक सभी बाजारों में इस फैसले को लेकर हलचल मची हुई है। उन्होंने मांग की कि वित्त मंत्रालय और एनपीसीआई को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा, यह जो अतिरिक्त खर्च आएगा, वह सीधे रिटेलर और उन छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा, जिन्होंने डिजिटल पेमेंट को अपनाया था, लेकिन अब उन्हें ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। -आईएएनएस
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