अनमोल मलिक : खामोशी से पैदा हुई एक आवाज, जो आज लिखती है खुद अपनी धुन

By: Team Aapkisaheli | Posted: 04 Feb, 2026

अनमोल मलिक : खामोशी से पैदा हुई एक आवाज, जो आज लिखती है खुद अपनी धुन
नई दिल्ली। हर साल 5 फरवरी सिर्फ एक तारीख नहीं है; यह उस उम्मीद का दिन है जिसने हार मानने से इनकार कर दिया। यह दिन है एक ऐसी रचनात्मक आत्मा का जन्मदिन जिनकी जिंदगी खुद एक स्क्रिप्ट की तरह है। मुंबई की हलचल भरी दुनिया में जन्मी अनमोल मलिक, नाम की तरह ही सचमुच अनमोल साबित हुईं। 

ऑड्रे पियानो के नाम से जानी जाने वाली यह कलाकार आज किसी परिचय की मोहताज नहीं। वह सिर्फ एक प्रसिद्ध परिवार की बेटी नहीं, बल्कि एक ऐसी रचनाकार हैं जिन्होंने मेहनत, संवेदना और साहस के साथ अपनी पहचान खुद गढ़ी। अनमोल के लिए संगीत कोई शौक नहीं था, वह तो एक भाषा थी। महज पांच साल की उम्र में उनकी आवाज ने सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दे दी। स्टूडियो की लाइट्स, माइक की ऊंच-नीच और धुनों की बारीकियां, ये सब उनके लिए खेल जैसी थीं। 

स्कूल के दिनों में रिकॉर्ड किया गया एक मस्ती भरा गाना उन्हें हर घर की पहचान बना गया और तभी यह स्पष्ट हो गया था कि ये आवाज भीड़ में खोने वाली नहीं है। हालांकि, सुरों की दुनिया उनके लिए खुली थी, लेकिन अनमोल ने खुद को सिर्फ एक रास्ते तक सीमित नहीं रखा। 

पढ़ाई के लिए विदेश जाना, टेक्नोलॉजी, फिल्म और बिजनेस को साथ-साथ समझना, यह सब उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की झलक देता है। लौटकर उन्होंने कॉर्पोरेट क्रिएटिव स्पेस से लेकर फिल्म स्टूडियोज तक, हर जगह अपनी सोच की छाप छोड़ी। 

विज्ञापन की भाषा हो या सिनेमा की संवेदना, अनमोल ने हर मंच पर कहानी को केंद्र में रखा। कुछ समय कैमरे के पीछे सीखते हुए, फिर शब्दों को दिशा देते हुए, वह उस मुकाम तक पहुंचीं जहां कहानियों की कमान उनके हाथ में थी। 
बड़े बैनर के तहत फिल्मों के साथ काम करते हुए, उन्होंने साबित किया कि क्रिएटिव लीडरशिप उम्र या उपनाम की मोहताज नहीं होती। फिर आया वह पल, जब अनमोल ने अपनी अंदरूनी दुनिया को किताब के पन्नों में ढाल दिया। उनकी पहली पुस्तक ने यह साफ कर दिया कि चाहे संगीत हो, सिनेमा या साहित्य, भावनाओं की सच्चाई ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। -आईएएनएस

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