स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

वो जमाने चले गए जब मोटा दिखना खाते-पीते घर की निशानी माना जाता था। अब हर युवा-युवती खुद को पतला दिखाने का भरसक प्रयास करता है। कोई जिम के चक्कर काटता है, तो कोई डायटिंग करता है लेकिन वो परिणाम नहीं मिल पाते जिनकी वो उम्मीद करता है। हम आपके लिए कुछ ऎसे ही टिप्स लाए हैं जिनके प्रयोग से आपके लिए स्लिम होना अब मुश्किल की बात नहीं रह जाएगी-

स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

अगर मोटापा कम नहीं हो रहा है,  तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या फिर काली मिर्च को शामिल करके वजन को काबू में किया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया है कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है।

स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्सीकम से जलन पैदा होती है, जो भूख कम करती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ जाती है जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।

स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

बर्गर पर कैचअप और मेयोनीज लगा कर खाने के बजाए एक बेड बाउल में हल्की उबली पालक, कच्चा टमाटर और प्याज चौकोर टुकडों में काट काली मिर्च व नमक छिडक कर खाएं। आपको विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन एक साथ मिलेंगे। पेट भी भरेगा और छरहरी बनी रहेंगी सो अलग।

स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

गांठ गोभी विटामिन सी से भरपूर होती है जो कि शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट है। ये कोशिकाओं को सुरक्षित रखता है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। ब्रिस्क वॉक के साथ आप गांठ गोभी डाइट में शामिल करके अपनी लाइफस्टाइल को फिट रख सकती हैं।

स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

एक कप गांठगोभी में 36 कैलोरी होती है। इसमें केले की तुलना में पोटेशियम थोडा अधिक मात्रा में होता है। इसका फाइबर हेल्दी वजन बनाए रखने और पेट के कैंसर के खतरे को दूर करने में मददगार है।

स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

तला-भुना भोजन ना खाएं व भूख से 1 रोटी कम खाने का उपाय भी मोटापा कम करने में बहुत कारगर सिद्ध होता है।

स्लिम होना है तो अजमाएं यह टिप्स

किचन गार्डन से लौकी तोड उसका 1 छोटा ग्लास जूस बना करसुबह खाली पेट इसे पीने से भी वजन कम होता है। ये क्रिया कम से कम 3 महीने तक करनी चाहिए।

मोटापे की लडाई जीतने का बडा मंत्र

यह सौ फीसदी सच है कि नपा-तुला बदन ना सिर्फ खूबसूरती का आईना है, बल्कि तदुंरूस्ती के लिहाज से भी सर्वगुणी है। आंकडों के जोड-तोड से यह सिद्ध हो चुका है कि आप ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डाइबिटीज, कोरोनरी हार्ट डिजीज, गठिया, गॉल ब्लैडर की पथरी और कुछ खास किस्म के कैंसर से खैर मनाना चाहें, तो चरबी से छुटकारा पा लेने में ही भलाई है। मोटापा कम रकने के अपने संकल्प पर डटे रहिए। मोटापे की लडाई जीतने का यही सबसे बडा मंत्र है। बहुत से लोगा सिर्फ यह सोच कर हार मान लेते हैं कि उनकी कोशिशों कोई फायदा ही नहीं नजर आ रहा। लेकिन अगर आप धैर्य बनाए रखें और ठीक प्रकार से डाइटिंग करती रहें, तो यह मेहनत निश्चित तौर पर रंग लाएगी। मुमकिन है कि अगर दिखने में कुछ टाइम लगे, लेकिन अंतत: जीत आप ही की होगी।

मोटापे की लडाई जीतने का बडा मंत्र

अगर वजन घटाने का मन बनाएं। तो डाइटिंग करने के साथ व्यायाम पर भी पूरा जोर रखें। वैज्ञानिक परीक्षणों में पाया गया है कि वजन घटने से हçड्डयों में जमा अस्थिपुंज पर बुरा अगर पडता है ओर उनमें जमा खनिज भंडार घटने से हçड्डयों में ऑस्टियोपोररोसिस होने की दर तेज हो जाती है। इसके साथ ही पेशियों में संरक्षित प्रोटीन की मात्रा भी घट जाती है और उसकी जगह चरबी के नए भंडार लेकिन नियमित व्यायाम करके इन सभी परेशानियों से बचा जा सकता है। नियमित व्यायाम स्वास्थ्य के लिए कइ्र तरह से लाभकारी साबित होता है।

मोटापे की लडाई जीतने का बडा मंत्र

हर 15 दिन में अपना वजन तोलें। अगर इस बीच एक किलो वजन भी घट गया, तो आप ठीक रास्ते पर हैं। अपने इरादों को बुलंद रखने के लिए अपने छरहरे दिनों का कोई फोटो फ्रिज पर चिपका दें। यह तस्वीर आपको दुबले होने की कोशिशों पर टिके रहने का हौसला देगी।

मोटापे की लडाई जीतने का बडा मंत्र

सुबह-शाम के भोजन के बीच पानी सबसे बढिया आहार है। बार-बार पानी पीने से एक तो भूख कम लगती है और दूसरा बॉडी में नेगेटिव मेटाबॉलिज्म से उत्पन्न हो रहे जैविक रसायनों गुदोंü में छन कर यूरीन के साथ त्यागने में आसानी होती है।

मोटापे की लडाई जीतने का बडा मंत्र

जब कुछ खाने का मन करे, कच्चाी शाक-सब्जियों और फलों का आनंद लें। खीरा, गाजर मूली, टमाटर, प्याज लेटयूस, पत्तागोभी, सलाद और ताजा फलों में पौष्टिक तत्व तो मिलते ही हैं, उनमें कैलोरी भी कम होती है। इसके विरीत बिस्कुट, नमकीन, दालमोठ और मिठाई जैस चीजों का भोग लगाने से कैलोरी गणित को बिगडने में देर नहीं लगती।

दातों की खूबसूरती जिसे दुनिया निहारे...

अक्सर लोग दांतों की देखभाल की गंभीरता से नहीं लेते लेकिन दांतों को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है अन्यथा दांतों में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार यदि दांतों व मसूडों में अधिक समय तक रोग बने रहें तो कैंसर की आशंका कई गुना तक बढ जाता है। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिन व्यक्तियों को मसूडों के रोग होते हैं उनकी शिराओं के सिकुडने की संभावना अधिक रहती है, जिसके कारण उन्हें हार्टअटैक हो सकता है।

दातों की खूबसूरती जिसे दुनिया निहारे...

दांतों की सफाई उचित तरीके से नहीं करने पर दांतों के मध्य कैविटी बनने लगती है जिससे भोजन करने पर दांतों में ठंडा गरम महसूस होते लगता है। दांतों में ठंडा गरम महसूस होते लगता है। दांतों पर जमी प्लेक में स्थित बैक्टीरिया को जब भोजन से स्टार्च व शुगर मिलता है। तो एक प्रकार का एसिड बनता है जिससे दांतों की ऊपरी परत नष्ट होने लगती है और केविटी बन जाती है। ऎसा होने पर शीघ्र ही चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

दातों की खूबसूरती जिसे दुनिया निहारे...

दांतों के आसपास मसूडों से रक्त आना तथा मुख से दुगंध आना पायरिया रोग का लक्ष्य है। पायरिया के कारण दांतों की जडे कमजोर होती जाती हैं और धीरे-धीरे दांतों का हिलना प्रारंभ हो जाता है।

दातों की खूबसूरती जिसे दुनिया निहारे...

दांतों को स्वस्थ व स्वच्छ रखने के लिए कुछ बातों ध्यान रखना चाहिए दांतों को दिन में दो बार साफ करें। सख्त ब्रश का प्रयोग न करें।

दातों की खूबसूरती जिसे दुनिया निहारे...

चाकलेट, मिठाइयां, बिस्कुट आदि अधिक न खाएं।
अधिक खट्टी, ठंडी या गर्म वस्तुओं से परहेज करें।
भोजन हमेशा अच्छी तरह चबाकर खाएं।

दातों की खूबसूरती जिसे दुनिया निहारे...

पान मसाला, तम्बाकू आदि के सेवन से बचें।

फ्रूट्स संवारे आपका मूड

आज के समय में हम जिस तरह की जिंदगी जी रहे है। हर वक्त किस न किस बात की टेंशन का शिकार हो ही जाते है। जिसके पूरा असर हमारे शरीर पर होता है। पर आप एक बात जानते है क्या तनाव का संबंध हम जो कुछ खाते है उससे है आप अपने खाने पीने में थोडा बदलाव लाकर अपने अंदर एंनर्जी का संचार तो कर ही सकते हैं। जब हम टेंशन में होते है या फिर अपने को आपे से बाहर महसूस करते हैं तब दिमाग से एड्रीनलिन और कॉर्टिसोल हारमोन स्त्रावित होते हैं। शोधकर्ता के अनुसार टेंशन से बीमारियां ओस्टियोपोरोसिस, र्यूमेटॉइड आर्थराइटिस, बॉवल डिस्रार्डर जैसी बीमारियां हो सकती हैं । तनाव का पूरे शरीर पर उसी प्रकार असर होता है जिस तरह से दवाओं को लेते ही, धूम्रपान करने और शरीर में पानी की कमी होने पर होता है। जो लोग नाश्ते में कॉफी लेते हैं,दोपहर का खाना नहीं खाते,रात के खाने में भी प्रोसेस्ड चीजें लेते हैं। उनके शरीर में भी सूजन आने के काफी आसार होते है।

फ्रूट्स संवारे आपका मूड पानी

आप दिनभर में 8 गिलास पानी नियमित रूप से पीएं, क्योंकि जब शरीर तनाव में होता है। तो शरीर में से अतिरिक्त पानी के साथ पोषक तत्व बह कर निकल जाते हैं। प्रत्येक क्रिया के लिए शरीर पानी पर निभर करता है। अगर पानी की मात्रा शरीर में पर्याप्त ना हो, तो शरीर ठीक प्रकार से काम नहीं कर पाता। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान बहुत महसूस होती है। यहां तक कि शरीर सुस्त पड जाता है, खून गाढा हो जाता है, सिर दर्द व पाचन संबंधी विकार हो सकता है। और जिस कारण तनाव बढ जाता है।

फ्रूट्स   संवारे आपका मूड अनाज

जब शरीर तनाव में होता है तो उस समय उसे अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। शरीर को काबोहाइडे्रट आवश्कता होती है। क्योंकि यह शरीर में धीरे-धीरे स्त्रवित होने खून में शूगर का स्तर स्थिर रहता है और इंसुलिन का स्तर तेजी से ऊपर की तरफ नहीं जाता ।

फ्रूट्स  संवारे आपका मूड सब्जी

ताजी सब्जियां विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर होता हैं, और शरीर को सुचारू रूप से काम करने में मदद करती हैं। वही लोग शरीर तौर पर स्वस्थ होते है जिसमें एसिड और अल्कलाइन के बीच सही संतुलन हो मतलब कि जिनका पीएच का संतुलित हो। जब व्यक्ति का संतुलन बिगड जाता है। और उसमें एसिडिटी अधिक हो जाती है, तो शरीर पर सूजन आने के कारण तनावयुक्त स्थितियां बनने लगती है। सब्जियां अल्कलाइन होती हैं और वे खून में एसिडिटी की अधिकता के प्रभाव को दूर कर पीएच के संतुलन को कायम रखती है। इस तरह पूरे शरीर में सूजन के प्रभाव को कम भी करती हैं।

फ्रूट्स संवारे आपका मूड कैफीन

रोज 1 कप कॉफी पीना सेहत के लिए लाभदायक होती है। लेकिन इसके साथ ही कैफीन के हानिकारक प्रभावों को भी ध्यान रखना चाहिए अगर इसका अधिक मात्रा में पीने से शरीर खनिज तत्व सोख नहीं पाता,जिससे शरीर में सूजन बढ जाती है। कैफीन का संबंध उत्तेजना संबंधी विकारों और नींद में अडचन पैदा करने आदि से भी होता है। जिस कारण तनाव बढता है। कैफीन के सेवन से महिलाएं प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की शिकार हो जाती हैं और बे्रस्ट में गांठें हो जाती हैं। लिवर पर भी जोर पडता है। कॉफी का थोडी मात्रा में सेवन किया जाए, तो व्यक्ति पहले की ज्यादा और भी अधिक अर्लट हो जाता है और जिस कारण एकाग्रता से काम कर सकता है।

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